अल नीनो का असर: 10 साल बाद भारत में फिर सूखे की स्थिति, मानसून 2026 रहा कमजोर
मुख्य मौसम बिंदु
- 1871 से 2026 के बीच कुल 27 सूखे वर्ष दर्ज किए गए हैं।
- भारत में 2014 और 2015 में लगातार दो साल सूखा पड़ा था, जिसके पीछे अल नीनो की बड़ी भूमिका रही।
- 1950 के बाद 15 सूखे वर्ष रहे हैं, जबकि 1972 और 2009 में बारिश की कमी 20% से अधिक रही।2001 के बाद आए छह सूखों में से पांच अल नीनो से जुड़े रहे हैं।
- Forecast Validity: मौजूदा अल नीनो का प्रभाव 2027 की शुरुआती गर्मियों तक बने रहने का आकलन है, परिस्थितियों में बदलाव होने पर पूर्वानुमान बदल सकता है।
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भारत में पिछली बार सूखा 2015 में पड़ा था। उससे पहले 2014 और 2015 में लगातार दो साल सूखा पड़ा था। दोनों सालों में सूखे की बड़ी वजह अल नीनो था, खासकर 2015 का सूखा अल नीनो से ज्यादा प्रभावित था। इसके बाद 2023 में आया अल नीनो भी भारतीय मानसून के लिए अनुकूल नहीं रहा और उस साल सामान्य से कम बारिश हुई। हालांकि 2023 का मजबूत अल नीनो भारतीय मानसून पर वैसा बेहद गंभीर असर नहीं डाल सका, जैसी आशंका थी। इसके बावजूद मानसून सीजन में कुल बारिश सामान्य से 13% कम रही और इसे ‘हल्के सूखे’ (Mild Drought) की श्रेणी में रखा गया। आम तौर पर जब बारिश में कमी 10% से ज्यादा और कम दहाई के स्तर पर होती है, तो उसे हल्का सूखा माना जाता है। हालांकि इस श्रेणी के सूखे में भी देश के कुछ इलाकों में बारिश की कमी काफी गंभीर हो सकती है, जैसा कि इस साल भी देखने को मिला।

1871 से अब तक कितनी बार पड़ा सूखा?
1871 से 2026 के बीच भारत में कुल 27 साल ऐसे रहे हैं, जिन्हें सूखा वर्ष माना गया है। यहां सूखे की परिभाषा ऐसे सालों से है, जब अखिल भारतीय दक्षिण-पश्चिम मानसून वर्षा (AISMR) दीर्घकालिक औसत से एक मानक विचलन (Standard Deviation) से ज्यादा नीचे रही, यानी बारिश में कमी 10% से अधिक रही। इस लंबे रिकॉर्ड से यह भी पता चलता है कि लगातार दो साल सूखा पड़ना सामान्य स्थिति नहीं है। 1871 से 2026 के बीच छह बार सूखा एक साल के अंतराल के बाद आया, जबकि केवल पांच बार लगातार दो वर्षों में सूखा पड़ा। 1950 के बाद अब तक 15 सूखे वर्ष दर्ज हुए हैं—1951, 1965, 1966, 1972, 1974, 1979, 1983, 1986, 1987, 2002, 2004, 2009, 2014, 2015 और 2026। इनमें सबसे गंभीर सूखा 1972 और 2009 में रहा, जब बारिश में कमी 20% से अधिक थी। 1972 में बारिश 23.9% कम और 2009 में 21.8% कम रही थी।
मानसून में अच्छे और खराब दौर, आगे भी अल नीनो का असर
भारतीय मानसून में लंबे समय तक अच्छे और खराब दौर देखने को मिलते रहे हैं। उदाहरण के लिए, 1921 से 1940 के बीच लगातार 20 वर्षों तक कोई सूखा नहीं पड़ा। इसके बाद के दौर में स्थिति बदली और 1965 से 1987 के बीच दो दशकों से कुछ अधिक समय में 10 सूखे दर्ज किए गए। 21वीं सदी में 2002 से 2015 के बीच पांच सूखे पड़े और उसके बाद 10 साल का लंबा अंतर आया। अब 2026 में एक बार फिर सूखा दर्ज किया गया है। खास बात यह है कि 2016 से 2025 के बीच 10 में से सात साल मानसून सामान्य या सामान्य से बेहतर रहा। 2001 के बाद भारत में कुल छह बार मानसून सूखे की चपेट में आया और इनमें से पांच सूखे सीधे तौर पर अल नीनो से जुड़े थे। एकमात्र अपवाद 2014 रहा, जब अल नीनो की स्थितियां मानसून सीजन खत्म होने के बाद बनी थीं। मौजूदा अल नीनो 2026 के मानसून के बाद भी काफी मजबूत रहने की संभावना है और 2027 की सर्दियों की शुरुआत तक इसका प्रभाव बना रह सकता है। इसके बचे हुए प्रभाव अगले साल वसंत और शुरुआती गर्मियों तक भी बने रहने की संभावना है।
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