देश से दक्षिण-पश्चिम मानसून विदा, उत्तर-पूर्व मानसून की एंट्री से दक्षिण भारत में बढ़ेगी बारिश
मुख्य मौसम बिंदु
- दक्षिण-पश्चिम मानसून की देश से पूरी तरह विदाई के साथ उत्तर-पूर्व मानसून सक्रिय।
- तमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश और दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में बारिश की संभावना।
- मन्नार की खाड़ी, पाक जलडमरूमध्य और बंगाल की खाड़ी में चक्रवाती परिसंचरण व ट्रफ।
- अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में गतिविधियां कम होने के आसार हैं।
- Forecast Validity: इस मौसम पूर्वानुमान में मानसून की शुरुआत से लेकर अक्टूबर के अंतिम सप्ताह तक की संभावित स्थितियां शामिल हैं। 20–24 अक्टूबर के दौरान बारिश जारी रहने और अंतिम सप्ताह में विराम आने की संभावना है।
Advertisement
पूर्वानुमान के मुताबिक, आज देश से दक्षिण-पश्चिम मानसून पूरी तरह विदा हो गया है। इसके साथ ही दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में उत्तर-पूर्व मानसून ने दस्तक दे दी है। इससे पहले 15 अक्टूबर को तमिलनाडु, पुडुचेरी, कराईकल, तटीय आंध्र प्रदेश, रायलसीमा, दक्षिण आंतरिक कर्नाटक, केरल और माहे में मानसून के आगमन से पहले की बारिश दर्ज की गई थी। उत्तर-पूर्व मानसून की समय पर शुरुआत के लिए जरूरी सभी मौसमी परिस्थितियां अनुकूल हो गई थीं। पिछले साल भी दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी और उत्तर-पूर्व मानसून का आगमन एक ही दिन, यानी 16 अक्टूबर 2025 को हुआ था। इस बार भी दोनों मानसून की विदाई और शुरुआत लगभग एक साथ हुई है।
Advertisement

सैटेलाइट इमेज, Himawari
दक्षिण भारत में अगले एक सप्ताह तक बारिश
उत्तर-पूर्व मानसून के आगमन के साथ हवाओं की दिशा में बदलाव हुआ है और पूर्वी हवाएं सक्रिय हो गई हैं। तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के पूरे तटीय क्षेत्र में ये हवाएं 5,000 फीट से अधिक ऊंचाई तक प्रभावी हो रही हैं। इस बदलाव के कारण दक्षिण भारत में बारिश की गतिविधियां तेज होने की संभावना है। अगले एक सप्ताह तक दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत के कई हिस्सों में व्यापक बारिश हो सकती है। कुछ स्थानों पर भारी बारिश भी संभव है। यह बारिश अगले सप्ताहांत तक भी जारी रह सकती है। उत्तर-पूर्व मानसून के दौरान मुख्य रूप से पांच मौसम उपखंड प्रभावित होते हैं: तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल; केरल और माहे; तटीय आंध्र प्रदेश और यनम; रायलसीमा; तथा दक्षिण आंतरिक कर्नाटक। इन क्षेत्रों में उत्तर-पूर्व मानसून की बारिश कृषि, जलाशयों और जल उपलब्धता के लिए महत्वपूर्ण होती है।

कर्नाटक, गोवा, तेलंगाना और महाराष्ट्र में भी हो सकती है बारिश
उत्तर-पूर्व मानसून की मुख्य बारिश दक्षिण भारत के पूर्वी और दक्षिणी हिस्सों में होती है, लेकिन इसका असर दूसरे क्षेत्रों में भी दिखाई देता है। तटीय कर्नाटक, उत्तर आंतरिक कर्नाटक, कोंकण और गोवा, तेलंगाना तथा महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में भी बारिश हो सकती है। इसके विपरीत, अक्टूबर से दिसंबर के दौरान भारत के उत्तरी, मध्य और पूर्वी हिस्सों में उत्तर-पूर्व मानसून के कारण आमतौर पर बहुत कम बारिश होती है। हालांकि, इस अवधि में यदि चक्रवाती तूफान बनते हैं, तो समुद्र तट के दोनों ओर मौसम खराब होने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे तूफान कभी-कभी अपनी दिशा बदलकर पूर्वी और उत्तर-पूर्वी भारत की ओर बढ़ते हैं। इस दौरान लंबे समय तक भारी बारिश हो सकती है, जिससे कुछ क्षेत्रों में बाढ़ जैसी स्थिति भी पैदा हो सकती है।

Advertisement
मानसून की शुरुआत में ही मजबूत बारिश, 24 अक्टूबर तक जारी रहने के आसार
इस बार उत्तर-पूर्व मानसून की शुरुआत मजबूत रहने की संभावना है। ऐसा हर साल नहीं होता कि मानसून के आगमन के साथ ही इतनी सक्रिय मौसमी परिस्थितियां बन जाएं। तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के पास बंगाल की खाड़ी में इस समय मौसम काफी सक्रिय है। मन्नार की खाड़ी, पाक जलडमरूमध्य और तमिलनाडु के दक्षिणी तट के करीब दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में निचले स्तर पर एक बंद चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ है। इसके अलावा, एक उत्तर-दक्षिण ट्रफ पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी तक, आंध्र प्रदेश के तट के पास फैली हुई है। यह चक्रवाती परिसंचरण धीरे-धीरे पूर्व की ओर बढ़ेगा और दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत से बाहर निकलने में लगभग 4–5 दिन ले सकता है। इसके अरब सागर की ओर बढ़ जाने के बाद भी मौसम तुरंत शांत नहीं होगा। गोवा, तटीय कर्नाटक, केरल और प्रायद्वीपीय भारत के आंतरिक हिस्सों में 20 से 24 अक्टूबर के बीच रुक-रुककर हल्की से मध्यम बारिश जारी रह सकती है। हालांकि, अक्टूबर 2026 के अंतिम सप्ताह में बारिश की गतिविधियों में विराम आने की संभावना है।















