बंगाल की खाड़ी से चला मौसम सिस्टम उत्तर प्रदेश में हुआ खत्म, अब बारिश थमने के आसार

By: AVM GP Sharma | Edited By: Mohini Sharma
Sep 28, 2026, 6:30 PM
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मुख्य मौसम बिंदु

  • अंडमान सागर का सिस्टम आंध्र प्रदेश, ओडिशा, छत्तीसगढ़, एमपी होते हुए यूपी पहुंचा।
  • पूर्वी यूपी में अभी भी 1.5 से 3.1 किमी की ऊंचाई पर चक्रवाती परिसंचरण मौजूद है।
  • सिस्टम के कारण आंध्र प्रदेश, ओडिशा, एमपी, यूपी और हिमालय की तलहटी में भारी बारिश।
  • 28 सितंबर से पूर्वी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भारी बारिश की कोई चेतावनी नहीं है ।
  • पूर्वानुमान वैधता: यह पूर्वानुमान 28 सितंबर से 30 सितंबर 2026 तक मान्य है, किसी नए मौसम सिस्टम के बनने या मौजूदा परिसंचरण में बदलाव होने पर पूर्वानुमान बदल सकता है।

बंगाल की खाड़ी और अंडमान सागर से शुरू हुआ लंबे समय तक सक्रिय रहा मौसम सिस्टम अब उत्तर प्रदेश के ऊपर कमजोर होकर खत्म हो गया है। इसके सतह पर अब ऐसा कोई स्पष्ट निम्न दबाव क्षेत्र नहीं है, जिसे एक संगठित मौसम सिस्टम के रूप में पहचाना जा सके। हालांकि, इससे जुड़ा ऊपरी हवा का चक्रवाती परिसंचरण अभी भी पूर्वी उत्तर प्रदेश में करीब 1.5 से 3.1 किलोमीटर की ऊंचाई पर बना हुआ है। इस सिस्टम की शुरुआत उत्तर अंडमान सागर में बने निम्न दबाव क्षेत्र से हुई थी। यह उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ते हुए बंगाल की खाड़ी से गुजरा और पहले डिप्रेशन तथा फिर डीप डिप्रेशन में मजबूत हुआ।

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इसके बाद यह 23-24 सितंबर की आधी रात के आसपास कलिंगपट्टनम के दक्षिण-पश्चिम में उत्तरी आंध्र प्रदेश तट को पार कर गया। जमीन पर आने के बाद यह उत्तरी आंध्र प्रदेश, दक्षिणी ओडिशा, छत्तीसगढ़ और पूर्वी मध्य प्रदेश से होते हुए दक्षिण-पूर्वी उत्तर प्रदेश तक पहुंचा। खास बात यह रही कि यह सिस्टम जमीन के काफी अंदर तक डिप्रेशन की ताकत बनाए रहा। 27 सितंबर को यह मध्य उत्तर प्रदेश के उत्तरी हिस्सों में एक अच्छी तरह चिह्नित निम्न दबाव क्षेत्र में कमजोर हुआ और सोमवार को सतह पर इसका निम्न दबाव भी खत्म हो गया। इसके साथ इसका संगठित मौसम चक्र समाप्त हो गया है।

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सिस्टम खत्म, लेकिन बादल और हल्की बारिश तुरंत नहीं रुकेंगे

किसी निम्न दबाव क्षेत्र के “कमजोर होकर कम स्पष्ट होने” का मतलब यह है कि मौसम विशेषज्ञ अब जमीन की सतह पर उसके चारों तरफ बना स्पष्ट और बंद दबाव क्षेत्र नहीं देख पा रहे हैं। लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि बादल और बारिश उसी समय पूरी तरह खत्म हो जाएंगे। ऊपरी हवा में बचा हुआ चक्रवाती परिसंचरण अभी भी कुछ जगहों पर हल्की बारिश या गरज के साथ बौछारें करा सकता है, खासकर जहां पर्याप्त नमी और हवाओं के मिलने से बारिश के लिए अनुकूल स्थिति बने।

इसके अलावा उत्तर पाकिस्तान और उससे सटे जम्मू के ऊपर एक पश्चिमी विक्षोभ भी ऊपरी हवा में चक्रवाती परिसंचरण के रूप में मौजूद है। जैसे-जैसे यह पश्चिमी विक्षोभ और कमजोर हो चुके उष्णकटिबंधीय सिस्टम के बीच का संपर्क कम होगा, वैसे-वैसे वह बड़ी मौसमी स्थिति भी कमजोर होगी, जिसने उत्तर प्रदेश और पश्चिमी हिमालय में भारी बारिश कराई थी। इसलिए आने वाले समय में स्थानीय स्तर पर बादल या गरज के साथ बारिश हो सकती है, लेकिन इसे अब सक्रिय डिप्रेशन का प्रभाव नहीं माना जाएगा।

कई राज्यों में भारी बारिश के बाद अब मौसम शांत होने के आसार

इस सिस्टम ने अपने पूरे सफर के दौरान कई राज्यों में असाधारण बारिश कराई। आंध्र प्रदेश के तट से गुजरते समय बहुत भारी बारिश हुई, जबकि इसके बाद दक्षिणी ओडिशा और बस्तर में भी बेहद अधिक बारिश दर्ज हुई। आगे बढ़ने पर इसने मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और हिमालय की तलहटी वाले क्षेत्रों में भारी बारिश कराई। सबसे गंभीर तेज हवा का खतरा आंध्र प्रदेश तट के आसपास रहा, लेकिन इसके प्रभाव से काफी अंदर तक बाढ़, जलभराव, आकाशीय बिजली और फसलों को नुकसान हुआ। धान, मक्का, दलहन, कपास, सोयाबीन, गन्ना और सब्जियों की खेती वाले क्षेत्रों पर भी इसका असर पड़ा। जहां खेतों में अभी भी पानी भरा है या ग्रामीण सड़कें क्षतिग्रस्त हुई हैं, वहां स्थिति सामान्य होने में समय लग सकता है।

अब 28 सितंबर से पूर्वी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए भारी बारिश की कोई चेतावनी नहीं है। उत्तर और मध्य भारत के बड़े हिस्से में मौसम धीरे-धीरे शुष्क होने की उम्मीद है। हालांकि, स्थानीय स्तर पर गरज के साथ बारिश हो सकती है। सिस्टम के कमजोर होने से दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी भी फिर से आगे बढ़ सकती है, लेकिन इसे अभी केवल पूर्वानुमान की संभावना माना जा रहा है। सोमवार सुबह तक मानसून वापसी की रेखा में कोई आधिकारिक बदलाव नहीं हुआ था।

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AVM GP Sharma
President of Meteorology & Climate Change
AVM Sharma, President of Meteorology & Climate Change at Skymet Weather Services, is a retired Indian Air Force officer who previously led the Meteorological Branch at Air Headquarters in New Delhi. With over a decade of experience at Skymet, he brings a wealth of knowledge and expertise to the organization.
FAQ

यह सिस्टम उत्तर प्रदेश में पहुंचने के बाद कमजोर होकर खत्म हो गया है। हालांकि, पूर्वी उत्तर प्रदेश में ऊपरी हवा का चक्रवाती परिसंचरण अभी भी बना हुआ है।

ऐसा जरूरी नहीं है। ऊपरी हवा में मौजूद परिसंचरण के कारण कुछ स्थानों पर हल्की बारिश या गरज के साथ बौछारें पड़ सकती हैं, लेकिन भारी बारिश की संभावना काफी कम हो गई है।

सिस्टम के कमजोर होने से मानसून की वापसी आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल हो सकती हैं। हालांकि, 28 सितंबर की सुबह तक वापसी की रेखा में कोई आधिकारिक बदलाव नहीं हुआ था।

डिस्क्लेमर: डिस्कलेमर- यह विश्लेषण स्काइमेट के मौसम संबंधी आंकड़ों, आंतरिक पूर्वानुमान मॉडल, मौसम केंद्रों से प्राप्त जानकारी, जलवायु संबंधी डेटा और स्काइमेट की मौसम विशेषज्ञ टीम के आकलन पर आधारित है। सटीक जानकारी देने का पूरा प्रयास किया गया है, लेकिन मौसम लगातार बदलने वाली प्राकृतिक प्रक्रिया है, इसलिए परिस्थितियां समय के साथ बदल सकती हैं। यह जानकारी केवल सामान्य सूचना के उद्देश्य से दी गई है और इसे अंतिम या पूरी तरह निश्चित मौसम पूर्वानुमान नहीं माना जाना चाहिए।

Skymet भारत की सबसे बेहतर और सटीक निजी मौसम पूर्वानुमान और जलवायु इंटेलिजेंस कंपनी है, जो देशभर में विश्वसनीय मौसम डेटा, मानसून अपडेट और कृषि जोखिम प्रबंधन समाधान प्रदान करती है