दक्षिण-पश्चिम मानसून की विदाई का काउंटडाउन शुरू, उत्तर भारत से जल्द वापसी के संकेत
मुख्य मौसम बिंदु
- पश्चिमी राजस्थान से मानसून की वापसी जल्द शुरू होने के आसार हैं।
- मानसून वापसी के प्रमुख संकेतों में बारिश कम होना, नमी घटना, तापमान बढ़ना, हवाओं का रुख बदलना और आसमान साफ होना शामिल हैं।
- मानसून की वापसी लगातार एक समान गति से नहीं होती, इसमें तेजी और ठहराव दोनों देखने को मिलते हैं।
- अगले सप्ताह बंगाल की खाड़ी में संभावित चक्रवाती तूफान मध्य और पूर्वी भारत से मानसून की वापसी को प्रभावित कर सकता है।
- पूर्वानुमान वैधता: यह विश्लेषण 16 सितंबर 2026 तक उपलब्ध मौसम परिस्थितियों पर आधारित है; बंगाल की खाड़ी में बनने वाले सिस्टम की दिशा और तीव्रता बदलने पर पूर्वानुमान में बदलाव संभव है।
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दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी की परिस्थितियां अब अनुकूल होती जा रही हैं और जल्द ही इसकी विदाई की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। सामान्य तौर पर मानसून की वापसी की शुरुआत पश्चिमी राजस्थान से होती है और उत्तरी हिस्सों से यह प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ती है। मानसून की वापसी का कलन हमेशा पिछली परिस्थितियों के आधार पर किया जाता है। यानी जरूरी मौसम परिस्थितियों का कुछ दिनों तक लगातार बने रहना जरूरी होता है, उसके बाद ही किसी क्षेत्र से मानसून की वापसी की घोषणा की जाती है। किसी क्षेत्र से मानसून की वापसी का मतलब यह नहीं है कि वहां इसके बाद बारिश पूरी तरह बंद हो जाएगी। स्थानीय और छिटपुट बारिश की संभावना बनी रह सकती है।
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मानसून की वापसी सीधी रेखा में नहीं होती
मानसून की वापसी कभी भी एक समान और लगातार प्रक्रिया नहीं रही है। मानसून वापसी की रेखा कई बार तेजी से आगे बढ़ती है, जिसे लीप यानी छलांग कहा जा सकता है, जबकि कई बार इसमें कुछ दिनों का ठहराव भी आता है। पूरे देश से दक्षिण-पश्चिम मानसून की आधिकारिक वापसी 1 अक्टूबर के बाद ही पूरी मानी जाती है, लेकिन सामान्य तौर पर यह प्रक्रिया अक्टूबर के मध्य तक समाप्त हो जाती है। दक्षिण-पश्चिम मानसून की पूरी वापसी उत्तर-पूर्वी मानसून के आगमन से पहले होना जरूरी है। दोनों मानसूनी धाराओं के स्रोत और विशेषताएं अलग-अलग हैं और देश के ऊपर दोनों का एक साथ प्रभावी रूप से बने रहना संभव नहीं होता।
मानसून की वापसी के लिए कौन-सी परिस्थितियां जरूरी?
मानसून की वापसी शुरू होने के लिए कुछ प्रमुख मौसम संकेतों का एक साथ दिखना जरूरी होता है। इनमें बारिश की गतिविधियों का रुकना या काफी कम होना, हवा में नमी यानी आर्द्रता के स्तर में गिरावट, तापमान में बढ़ोतरी, हवाओं के पैटर्न में बदलाव और आसमान का अधिकतर साफ रहना प्रमुख हैं। इन परिस्थितियों के बनने पर मानसून की वापसी का प्रभाव जमीन पर स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगता है।
इस साल राजस्थान की सीमा से मानसून की वापसी शुरू होने की निर्धारित तारीख 17 सितंबर है। पिछले साल 2025 में यह प्रक्रिया कुछ पहले, 14 सितंबर को शुरू हुई थी और 16 अक्टूबर 2025 को पूरी हुई थी। इसी दिन दक्षिणी प्रायद्वीप में उत्तर-पूर्वी मानसून का आगमन भी हुआ था। यह भी महत्वपूर्ण है कि देश में दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी और उत्तर-पूर्वी मानसून के आगमन का El Niño परिस्थितियों से कोई सीधा संबंध नहीं है।
गुजरात-राजस्थान का सिस्टम हुआ दूर, अब बंगाल की खाड़ी पर नजर
इस साल पश्चिमी राजस्थान से मानसून की वापसी में देरी का एक प्रमुख कारण गुजरात और राजस्थान के ऊपर बना निम्न दबाव क्षेत्र रहा है। अब यह मौसम प्रणाली देश की भौगोलिक सीमा से बाहर निकल चुकी है, जिससे वापसी की प्रक्रिया के लिए परिस्थितियां बेहतर हो रही हैं। हालांकि, अगले सप्ताह बंगाल की खाड़ी में एक चक्रवाती तूफान विकसित होने की संभावना बन रही है।
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अगर ऐसा सिस्टम विकसित होता है तो इसका असर देश के मध्य और पूर्वी हिस्सों से मानसून की आगे की वापसी पर पड़ सकता है। इसलिए मानसून की वापसी की प्रक्रिया आगे किस गति से बढ़ती है, यह काफी हद तक बंगाल की खाड़ी में बनने वाली इस संभावित प्रणाली पर निर्भर करेगा और इस सिस्टम पर नजर रखना जरूरी होगा।
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