महाराष्ट्र के ज्यादातर हिस्सों से मानसून विदा, बारिश की कमी 19%, आगे सूखे के आसार

By: AVM GP Sharma | Edited By: Mohini Sharma
Oct 5, 2026, 4:30 PM
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महाराष्ट्र मौसम अपडेट, फोटो: AI Generated

मुख्य मौसम बिंदु

  • महाराष्ट्र के बड़े हिस्सों से मानसून विदा हो चुका है, जबकि बाकी हिस्सों से भी जल्द वापसी की संभावना है।
  • 1 जून से 30 सितंबर के बीच राज्य में 19% बारिश की कमी रही, इसलिए आधिकारिक श्रेणी सामान्य रही।
  • मराठवाड़ा में 39%, विदर्भ में 27% और मध्य महाराष्ट्र में 7% बारिश की कमी दर्ज हुई।
  • अगले 10 दिनों में बारिश की संभावना बेहद कम है।
  • पूर्वानुमान वैधता: यह मौसम पूर्वानुमान 6 से 15 अक्टूबर 2026 तक लागू है, बंगाल की खाड़ी या अरब सागर में नई सक्रिय मौसम प्रणाली बनने पर स्थिति बदल सकती है

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दक्षिण-पश्चिम मानसून महाराष्ट्र के बड़े हिस्से से विदा हो चुका है। राज्य की राजधानी मुंबई और नागपुर से भी मानसून सामान्य समय से पहले लौट गया है। महाराष्ट्र में कुल 36 जिले हैं, जो छह प्रशासनिक मंडलों कोंकण, पुणे, नासिक, अमरावती, नागपुर और छत्रपति संभाजीनगर में फैले हैं। इससे पहले राज्य सरकार 32 जिलों में सूखा घोषित कर चुकी है। महाराष्ट्र में मानसून वापसी की रेखा फिलहाल ब्रह्मपुरी, परभणी, बारामती और मुंबई के दक्षिण से होकर गुजर रही है। अक्टूबर में अब तक राज्य में लगभग कोई बारिश नहीं हुई है और अगले एक सप्ताह से 10 दिनों तक भी यही स्थिति बने रहने की संभावना है। राज्य के बचे हुए हिस्सों से भी मानसून कभी भी पूरी तरह विदा हो सकता है। ऐसे में महाराष्ट्र में लंबे समय तक सूखा मौसम रहने की संभावना है और अक्टूबर में अब आगे बारिश होने की उम्मीद काफी कम है।

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महाराष्ट्र में 19% बारिश की कमी, फिर भी आधिकारिक श्रेणी सामान्य

1 जून से 30 सितंबर 2026 के बीच महाराष्ट्र में कुल 804.4 मिमी बारिश दर्ज हुई, जबकि पूरे मानसून सीजन की सामान्य बारिश 994.5 मिमी है। इस तरह राज्य में कुल बारिश की कमी 19% रही है। इसलिए आधिकारिक तौर पर महाराष्ट्र की मानसूनी बारिश की श्रेणी सामान्य रहेगी। किसी राज्य को बारिश की कमी वाला यानी डिफिशिएंट तभी माना जाता है, जब सामान्य से कमी 20% या उससे अधिक हो। महाराष्ट्र के बारिश के आंकड़ों को चार उप-विभागों में देखा जाता है। इनमें से तीन क्षेत्र समुद्र से दूर हैं, जबकि कोंकण को करीब 400 किलोमीटर लंबी समुद्री तटरेखा मिली हुई है। इन उप-विभागों में मराठवाड़ा में सबसे अधिक 39% बारिश की कमी रही, जबकि विदर्भ में 27% कमी दर्ज हुई। मध्य महाराष्ट्र में भारी बारिश के दो दौरों ने स्थिति को काफी संभाला और यहां बारिश की कमी केवल 7% रही। वहीं अधिक बारिश के लिए जाने जाने वाले कोंकण और गोवा क्षेत्र में भी पूरे सीजन में सामान्य से 15% कम बारिश दर्ज हुई।

12 अक्टूबर तक मानसून की विदाई सामान्य, अब लंबे सूखे का दौर

आमतौर पर दक्षिण-पश्चिम मानसून 12 अक्टूबर तक पूरे महाराष्ट्र से विदा हो जाता है, हालांकि इसमें कुछ दिनों का अंतर सामान्य माना जाता है। अगले 10 दिनों में राज्य में किसी महत्वपूर्ण बारिश की संभावना बेहद कम है। मानसून की विदाई के बाद महाराष्ट्र में मौसम काफी शुष्क हो जाता है और बारिश की संभावना बहुत कम रह जाती है। आगे बारिश की संभावना तभी बढ़ सकती है, जब बंगाल की खाड़ी में मानसून के बाद के मौसम का कोई तूफान या मौसम सिस्टम बने और वह मध्य भारत के अंदरूनी हिस्सों तक पहुंच जाए। दूसरी ओर, अरब सागर में भी कभी-कभी उष्णकटिबंधीय तूफान बनते हैं। अगर ऐसा कोई सिस्टम कोंकण और गोवा के पास से गुजरते हुए गुजरात तट की ओर बढ़ता है तो महाराष्ट्र में बारिश की संभावना बन सकती है। हालांकि, अक्टूबर के मध्य तक बंगाल की खाड़ी या अरब सागर, दोनों तरफ ऐसी किसी स्थिति के बनने का पूर्वानुमान नहीं है। इसलिए फिलहाल महाराष्ट्र में लंबे सूखे मौसम की संभावना बनी हुई है।

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AVM GP Sharma
President of Meteorology & Climate Change
AVM Sharma, President of Meteorology & Climate Change at Skymet Weather Services, is a retired Indian Air Force officer who previously led the Meteorological Branch at Air Headquarters in New Delhi. With over a decade of experience at Skymet, he brings a wealth of knowledge and expertise to the organization.
FAQ

सामान्य तौर पर दक्षिण-पश्चिम मानसून 12 अक्टूबर तक पूरे महाराष्ट्र से विदा हो जाता है। इस साल राज्य के बड़े हिस्सों से इसकी वापसी पहले ही हो चुकी है।

1 जून से 30 सितंबर तक महाराष्ट्र में 804.4 मिमी बारिश हुई, जबकि सामान्य बारिश 994.5 मिमी है। यानी राज्य में 19% की कमी रही, इसलिए आधिकारिक श्रेणी सामान्य रही।

अगले 10 दिनों में बारिश की संभावना बेहद कम है। अक्टूबर के मध्य तक बंगाल की खाड़ी या अरब सागर में ऐसा कोई बड़ा मौसम सिस्टम बनने का अनुमान नहीं है, जो महाराष्ट्र में बारिश करा सके।

डिस्क्लेमर: डिस्कलेमर- यह विश्लेषण स्काइमेट के मौसम संबंधी आंकड़ों, आंतरिक पूर्वानुमान मॉडल, मौसम केंद्रों से प्राप्त जानकारी, जलवायु संबंधी डेटा और स्काइमेट की मौसम विशेषज्ञ टीम के आकलन पर आधारित है। सटीक जानकारी देने का पूरा प्रयास किया गया है, लेकिन मौसम लगातार बदलने वाली प्राकृतिक प्रक्रिया है, इसलिए परिस्थितियां समय के साथ बदल सकती हैं। यह जानकारी केवल सामान्य सूचना के उद्देश्य से दी गई है और इसे अंतिम या पूरी तरह निश्चित मौसम पूर्वानुमान नहीं माना जाना चाहिए।

Skymet भारत की सबसे बेहतर और सटीक निजी मौसम पूर्वानुमान और जलवायु इंटेलिजेंस कंपनी है, जो देशभर में विश्वसनीय मौसम डेटा, मानसून अपडेट और कृषि जोखिम प्रबंधन समाधान प्रदान करती है