मानसून बदलेगा करवट! दक्षिण-पश्चिम की विदाई के बाद उत्तर-पूर्वी मानसून की होगी शुरुआत

By: AVM GP Sharma | Edited By: Mohini Sharma
Oct 8, 2026, 1:45 PM
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मानसून 2026 अपडेट, फोटो: AI-Generated

मुख्य मौसम बिंदु

  • दक्षिण-पश्चिम मानसून अगले 2-3 दिनों में दक्षिण और मध्य भारत के बाकी हिस्सों से लौट सकता है।
  • पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत से मानसून की विदाई 14 अक्टूबर तक और पूरे देश से वापसी 15 अक्टूबर तक संभव है।
  • उत्तर-पूर्वी मानसून की आधिकारिक घोषणा के लिए मानसून वापसी, पूर्वी हवाओं और तमिलनाडु-आंध्र में बारिश सहित कई शर्तें जरूरी हैं।
  • उत्तर-पूर्वी मानसून की सामान्य शुरुआत की तारीख 20 अक्टूबर है, लेकिन पिछले वर्षों में यह नवंबर तक भी टला है।
  • पूर्वानुमान वैधता: यह आकलन 8-15 अक्टूबर 2026 के दौरान दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी और उत्तर-पूर्वी मानसून के संभावित संक्रमण से संबंधित है, मौसम परिस्थितियों में बदलाव होने पर समय में बदलाव संभव है।

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दक्षिण-पश्चिम मानसून अब वापसी के चरण में है और देश के उत्तर, पश्चिम तथा मध्य हिस्सों के अधिकांश भागों से विदा हो चुका है। अगले 2-3 दिनों के दौरान दक्षिण और मध्य भारत के बाकी हिस्सों से भी मानसून के लौटने की संभावना है। हालांकि, पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत के कुछ हिस्सों में मानसून की मौजूदगी कुछ और दिनों तक बनी रह सकती है। इन क्षेत्रों से मानसून की विदाई 14 अक्टूबर तक हो सकती है।

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देश से दक्षिण-पश्चिम मानसून की पूरी तरह वापसी 15 अक्टूबर तक होने की संभावना है। इसके बाद दक्षिणी प्रायद्वीप में उत्तर-पूर्वी मानसून के आगमन का रास्ता साफ होगा। उत्तर-पूर्वी मानसून को आमतौर पर शीतकालीन मानसून भी कहा जाता है और दक्षिण भारत, खासकर तमिलनाडु के लिए यह बारिश का बेहद महत्वपूर्ण मौसम है।

दक्षिण-पश्चिम और उत्तर-पूर्वी मानसून एक साथ सक्रिय नहीं रहते

भारतीय उपमहाद्वीप में दक्षिण-पश्चिम मानसून और उत्तर-पूर्वी मानसून की धाराएं सामान्य तौर पर एक साथ मौजूद नहीं रहतीं। हालांकि, कुछ मौकों पर दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी और उत्तर-पूर्वी मानसून की शुरुआत लगभग एक ही समय पर हुई है। यानी दोनों मौसम प्रणालियों के बीच कुछ समय के लिए संक्रमण की स्थिति बन सकती है।

उत्तर-पूर्वी मानसून की आधिकारिक शुरुआत 10 अक्टूबर से पहले घोषित नहीं की जाती, भले ही उससे पहले इसके लिए जरूरी मौसम परिस्थितियां अनुकूल क्यों न हो जाएं। इसके आगमन के लिए कई शर्तों का पूरा होना जरूरी है। सबसे पहले दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी रेखा का दक्षिणी प्रायद्वीप में 15° उत्तरी अक्षांश तक पहुंचना और देश के बाकी हिस्सों से मानसून की पूरी विदाई जरूरी है।

इसके साथ तमिलनाडु के तट पर लगातार दक्षिण-पूर्वी हवाओं का चलना, समुद्र तल से करीब 5,000 फीट या उससे अधिक ऊंचाई तक पूर्वी हवाओं की मौजूदगी और तटीय तमिलनाडु तथा दक्षिणी तटीय आंध्र प्रदेश में काफी व्यापक बारिश होना भी जरूरी है। इन सभी परिस्थितियों के बनने के बाद ही उत्तर-पूर्वी मानसून के आगमन की घोषणा की जाती है।

सामान्य तारीख 20 अक्टूबर, लेकिन कई बार नवंबर तक भी टला है मानसून

आंकड़ों के अनुसार, दक्षिण-पूर्वी या पूर्वी हवाओं के सामान्य रूप से स्थापित होने की तारीख 14 अक्टूबर मानी जाती है। वहीं लंबे समय के औसत के आधार पर उत्तर-पूर्वी मानसून के आगमन की सामान्य तारीख 20 अक्टूबर है। हालांकि, हर साल मानसून इसी तारीख के आसपास पहुंचे, यह जरूरी नहीं है।

पिछले वर्षों में कई बार उत्तर-पूर्वी मानसून की शुरुआत काफी देर से हुई है। उदाहरण के लिए 2018 में यह 1 नवंबर को आया था, जबकि 2000, 1992 और 1988 में 2 नवंबर को इसकी शुरुआत हुई। पिछले 50 वर्षों के आंकड़ों को देखें तो 40 वर्षों में उत्तर-पूर्वी मानसून 15 अक्टूबर या उसके बाद शुरू हुआ है। इनमें भी लगभग आधे अवसरों पर इसकी शुरुआत 25 अक्टूबर या उसके बाद हुई।

इसलिए इस साल भी केवल सामान्य तारीख को देखकर मानसून के आगमन का अनुमान नहीं लगाया जा सकता। दक्षिण-पश्चिम मानसून की विदाई और ऊपर बताई गई हवाओं तथा बारिश की परिस्थितियों के पूरी तरह विकसित होने के बाद ही उत्तर-पूर्वी मानसून की आधिकारिक शुरुआत होगी।

तमिलनाडु के लिए सबसे महत्वपूर्ण बारिश का मौसम

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आधिकारिक रिकॉर्ड के लिए उत्तर-पूर्वी मानसून को केवल पांच मौसम उप-विभागों तक सीमित माना जाता है। इनमें केरल, तमिलनाडु, तटीय आंध्र प्रदेश, रायलसीमा और दक्षिण आंतरिक कर्नाटक शामिल हैं। हालांकि, उत्तर-पूर्वी मानसून से जुड़ी बारिश की गतिविधियां दक्षिण प्रायद्वीप के इन पांच क्षेत्रों से आगे बढ़कर दक्षिण भारत के कई अन्य हिस्सों को भी प्रभावित कर सकती हैं।

तमिलनाडु के लिए उत्तर-पूर्वी मानसून सबसे महत्वपूर्ण बारिश का मौसम है। राज्य की सालाना बारिश का करीब 48% हिस्सा अक्टूबर, नवंबर और दिसंबर यानी OND तिमाही के दौरान मिलता है। यही वजह है कि उत्तर-पूर्वी मानसून की शुरुआत और इसकी गतिविधियां तमिलनाडु के लिए काफी महत्वपूर्ण होती हैं।

शीतकालीन मानसून के दौरान केरल और तमिलनाडु सबसे अधिक बारिश वाले क्षेत्रों में शामिल रहते हैं। दोनों राज्यों में उत्तर-पूर्वी मानसून के दौरान सामान्य मौसमी बारिश करीब 450 से 500 मिमी के बीच रहती है। कभी-कभी उत्तर-पूर्वी मानसून की गतिविधियां अक्टूबर-नवंबर-दिसंबर की निर्धारित अवधि से आगे भी जारी रहती हैं। हालांकि, रिकॉर्ड के लिए इसकी मौसमी बारिश की गणना 1 अक्टूबर से 31 दिसंबर के बीच ही की जाती है।

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AVM GP Sharma
President of Meteorology & Climate Change
AVM Sharma, President of Meteorology & Climate Change at Skymet Weather Services, is a retired Indian Air Force officer who previously led the Meteorological Branch at Air Headquarters in New Delhi. With over a decade of experience at Skymet, he brings a wealth of knowledge and expertise to the organization.
FAQ

उत्तर-पूर्वी मानसून की सामान्य शुरुआत 20 अक्टूबर मानी जाती है। हालांकि, आधिकारिक घोषणा तभी होगी जब दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी और जरूरी हवाओं व बारिश की सभी परिस्थितियां पूरी हो जाएंगी।

तमिलनाडु की वार्षिक बारिश का करीब 48% हिस्सा अक्टूबर से दिसंबर के दौरान मिलता है। इसलिए उत्तर-पूर्वी मानसून राज्य की पानी और बारिश की जरूरतों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

रिकॉर्ड के लिए इसके तहत केरल, तमिलनाडु, तटीय आंध्र प्रदेश, रायलसीमा और दक्षिण आंतरिक कर्नाटक को शामिल किया जाता है। हालांकि, बारिश की गतिविधियां दक्षिण भारत के अन्य हिस्सों तक भी फैल सकती हैं।

डिस्क्लेमर: डिस्कलेमर- यह विश्लेषण स्काइमेट के मौसम संबंधी आंकड़ों, आंतरिक पूर्वानुमान मॉडल, मौसम केंद्रों से प्राप्त जानकारी, जलवायु संबंधी डेटा और स्काइमेट की मौसम विशेषज्ञ टीम के आकलन पर आधारित है। सटीक जानकारी देने का पूरा प्रयास किया गया है, लेकिन मौसम लगातार बदलने वाली प्राकृतिक प्रक्रिया है, इसलिए परिस्थितियां समय के साथ बदल सकती हैं। यह जानकारी केवल सामान्य सूचना के उद्देश्य से दी गई है और इसे अंतिम या पूरी तरह निश्चित मौसम पूर्वानुमान नहीं माना जाना चाहिए।

Skymet भारत की सबसे बेहतर और सटीक निजी मौसम पूर्वानुमान और जलवायु इंटेलिजेंस कंपनी है, जो देशभर में विश्वसनीय मौसम डेटा, मानसून अपडेट और कृषि जोखिम प्रबंधन समाधान प्रदान करती है