मानसून की रफ्तार सुस्त, देश में बढ़ता जा रहा बारिश का घाटा, किसानों की चिंता बढ़ी

By: AVM GP Sharma | Edited By: Mohini Sharma
Jun 18, 2026, 1:45 PM
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मानसून 2026 पूर्वानुमान अपडेट

मुख्य मौसम बिंदु

  • मानसून 8 जून से पश्चिम में हरनाई और पूर्व में मुजफ्फरपुर के आसपास रुका।
  • देश का लगभग 66% क्षेत्र वर्षा घाटे या बड़े वर्षा घाटे की स्थिति में है।
  • मध्य भारत में बारिश की कमी 70% से 80% तक पहुंच गई है।
  • खाड़ी और अरब सागर में अब तक कोई प्रभावी मौसम प्रणाली विकसित नहीं।
  • पूर्वानुमान वैधता: 25 जून 2026 तक, जबकि 25 जून के बाद संभावित समुद्री गतिविधियों पर नजर रखी जाएगी।

दक्षिण-पश्चिम मानसून की प्रगति फिलहाल पूरी तरह धीमी पड़ गई है। मानसून ट्रफ (NLM) के पश्चिमी और पूर्वी दोनों छोर पर आगे बढ़ने की कोई नई गतिविधि नहीं हुई है। पश्चिमी छोर 8 जून से महाराष्ट्र के हरनाई के पास स्थिर बना हुआ है, जबकि पूर्वी छोर बिहार के मुजफ्फरपुर तक ही पहुंच पाया है। मानसून के ठहराव के कारण देश के कई हिस्सों में वर्षा घाटा तेजी से बढ़ रहा है और अनेक क्षेत्र लगभग सूखे जैसी स्थिति का सामना कर रहे हैं। वर्तमान में देश का लगभग 66 प्रतिशत क्षेत्र सामान्य से कम या बहुत कम वर्षा की श्रेणी में है। सबसे खराब स्थिति मध्य भारत की है, जहां वर्षा की कमी 70 से 80 प्रतिशत तक पहुंच गई है। मध्य क्षेत्र के सभी मौसम उपखंड गंभीर मानसूनी वर्षा संकट से गुजर रहे हैं।

उत्तर-पश्चिम भारत को पश्चिमी विक्षोभ से राहत

उत्तर-पश्चिम भारत में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ और ऊपरी वायुमंडलीय प्रणालियों ने मौसम को नम और अपेक्षाकृत अनुकूल बनाए रखा है। लगातार प्री-मानसून गतिविधियों के कारण पूर्वी उत्तर प्रदेश को छोड़कर पूरे उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र में अब तक सामान्य वर्षा दर्ज की गई है। हालांकि यह स्थिति अधिक समय तक नहीं रहने वाली है। संकेत हैं कि जून के अंतिम सप्ताह में यहां भी मानसून की गतिविधियां कमजोर पड़ सकती हैं। ऐसे में इस क्षेत्र का वर्षा घाटा जल्द ही 40 प्रतिशत से अधिक हो सकता है और महीने के अंत तक यह 50 प्रतिशत के करीब पहुंचने की आशंका है। यह स्थिति कृषि क्षेत्र और किसानों के लिए चिंता बढ़ा सकती है क्योंकि खरीफ फसलों की बुवाई काफी हद तक मानसूनी वर्षा पर निर्भर करती है।

मानसून की आगे की यात्रा के लिए जरूरी हैं समुद्री मौसम प्रणालियां

मानसून की शुरुआत के दौरान भूमध्य रेखा के दक्षिण से आने वाली तेज हवाओं यानी क्रॉस-इक्वेटोरियल फ्लो ने मानसून को आगे बढ़ाने में मदद की थी। इसी कारण इस बार मानसून ने शुरुआती चरण में अच्छी प्रगति की। लेकिन इस प्रक्रिया की अपनी सीमाएं हैं और इसका प्रभाव मुख्य रूप से दक्षिण भारत तथा अंडमान-निकोबार जैसे द्वीपीय क्षेत्रों तक ही रहता है। मानसून को देश के अन्य हिस्सों में आगे बढ़ाने के लिए बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में मजबूत मौसम प्रणालियों का बनना आवश्यक होता है। आमतौर पर बंगाल की खाड़ी मानसून को आगे बढ़ाने में प्रमुख भूमिका निभाती है। लेकिन इस सीजन में अब तक इन दोनों समुद्री क्षेत्रों में कोई प्रभावी निम्न दबाव क्षेत्र या मजबूत मौसम प्रणाली विकसित नहीं हो पाई है, जिसके कारण मानसून की प्रगति बाधित हो गई है।

25 जून के बाद बंगाल की खाड़ी में हलचल के संकेत

मौसम मॉडल कुछ कमजोर संकेत दे रहे हैं कि 25 जून के आसपास या उसके बाद म्यांमार की ओर से एक समुद्री चक्रवाती परिसंचरण बंगाल की खाड़ी में प्रवेश कर सकता है। हालांकि यह अभी केवल एक संभावित परिदृश्य है और इससे किसी बड़े या प्रभावशाली मौसम तंत्र के बनने की पुष्टि नहीं होती। फिलहाल ऐसा कोई मजबूत संकेत नहीं है जो मानसून में तत्काल तेजी का भरोसा दिलाए। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस संभावित गतिविधि पर करीबी नजर रखनी होगी। अगले सप्ताह की शुरुआत में स्थिति अधिक स्पष्ट होने पर ही मानसून की आगे की प्रगति और बारिश की संभावनाओं को लेकर ठोस आकलन किया जा सकेगा।

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AVM GP Sharma
President of Meteorology & Climate Change
AVM Sharma, President of Meteorology & Climate Change at Skymet Weather Services, is a retired Indian Air Force officer who previously led the Meteorological Branch at Air Headquarters in New Delhi. With over a decade of experience at Skymet, he brings a wealth of knowledge and expertise to the organization.
FAQ

बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में कोई मजबूत मौसम प्रणाली विकसित नहीं हुई है, जिसके कारण मानसून को आगे बढ़ाने वाला आवश्यक ट्रिगर नहीं मिल रहा है।

मध्य भारत सबसे अधिक प्रभावित है, जहां वर्षा की कमी 70 से 80 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है।

म्यांमार की ओर से बंगाल की खाड़ी में संभावित परिसंचरण के संकेत हैं, लेकिन अभी यह प्रारंभिक संभावना है और किसी बड़े सिस्टम की पुष्टि नहीं हुई है।

डिस्क्लेमर: यह जानकारी स्काइमेट की पूर्वानुमान टीम द्वारा किए गए मौसम और जलवायु विश्लेषण पर आधारित है। हम वैज्ञानिक रूप से सही जानकारी देने का प्रयास करते हैं, लेकिन बदलती वायुमंडलीय स्थितियों के कारण मौसम में बदलाव संभव है। यह केवल सूचना के लिए है, इसे पूरी तरह निश्चित भविष्यवाणी न मानें।

Skymet भारत की सबसे बेहतर और सटीक निजी मौसम पूर्वानुमान और जलवायु इंटेलिजेंस कंपनी है, जो देशभर में विश्वसनीय मौसम डेटा, मानसून अपडेट और कृषि जोखिम प्रबंधन समाधान प्रदान करती है