Monsoon 2026: अगस्त में 16% बारिश की कमी, मानसून सीजन का घाटा बढ़ा, सूखे का खतरा गहराया
मुख्य मौसम बिंदु
- अगस्त 2026 में देश में बारिश सामान्य से 16% कम रही।
- जून-अगस्त में मानसून सीजन में बारिश की कमी बढ़कर 14% हुई।
- आंध्र प्रदेश में 40% से अधिक, पंजाब में करीब 35% और राजस्थान-गुजरात में 25% से अधिक बारिश की कमी।
- 1–10 सितंबर के बीच पूर्वी राज्यों, छत्तीसगढ़,एमपी और यूपी में भारी बारिश की संभावना।
- पूर्वानुमान वैधता: यह मौसम विश्लेषण 1–10 सितंबर 2026 तक मान्य है। मानसून कुछ चुनिंदा हिस्सों में सक्रिय रहेगा।
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अगस्त 2026 में देशभर में बारिश सामान्य से 16% कम रही। स्काईमेट ने अपने संशोधित मानसून पूर्वानुमान में भी अगस्त के लिए लगभग इसी स्तर की कमी का संकेत दिया था। जून में बारिश 35% कम रही थी, जबकि जुलाई में बारिश सामान्य स्तर के आसपास रही। इसके बावजूद जून से अगस्त तक पूरे मानसून सीजन में बारिश की कमी 14% हो गई है। सितंबर से भी फिलहाल कोई मजबूत उम्मीद नहीं है। अगर सितंबर में भी बारिश सामान्य से केवल 10% कम रहती है, तो जून-सितंबर 2026 का पूरा मानसून सीजन करीब 13% की कमी के साथ समाप्त हो सकता है। यह स्थिति देश में 2014 के बाद एक दशक से अधिक समय के अंतराल के बाद सूखे की आशंका को मजबूत कर सकती है।
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आधे से ज्यादा मौसम उपखंडों में बढ़ा बारिश का तनाव
अगस्त की शुरुआत में ही मानसूनी सीजन में 12% की कमी बनी हुई थी। एक-दो दिनों को छोड़ दें तो लगभग पूरा अगस्त सामान्य से कम बारिश वाला रहा। महीने के दूसरे पखवाड़े में भी मौसमी बारिश की कमी 13–14% के बीच बनी रही। अगस्त के खराब प्रदर्शन से देश के 50% से अधिक मौसम संबंधी उपखंडों में बारिश की कमी और गंभीर हो गई है। खासकर पूरे दक्षिणी प्रायद्वीप में बारिश का अभाव बना हुआ है। आंध्र प्रदेश में बारिश की कमी 40% से भी ज्यादा है। स्थिति इसलिए चिंताजनक है क्योंकि अब इस कमी की अच्छी भरपाई की संभावनाएं कमजोर दिखाई दे रही हैं। पश्चिमी और मध्य भारत के कुछ हिस्से, खासकर महाराष्ट्र, भी बारिश की कमी से जूझ रहे हैं। राजस्थान और गुजरात में 25% से ज्यादा की कमी दर्ज की गई है। वहीं उत्तर भारत के प्रमुख कृषि राज्य पंजाब में मौसमी बारिश की कमी करीब 35% है, जो खेती के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है।
मानसून की विदाई का समय करीब, इस बार जल्दी वापसी के संकेत
दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी का समय अब नजदीक आ गया है। आधिकारिक तौर पर मानसून की वापसी 17 सितंबर से पश्चिमी राजस्थान की सीमा से शुरू मानी जाती है। हालांकि इस साल मानसून सामान्य तारीख का इंतजार नहीं कर सकता और पिछले साल की तरह कुछ दिन पहले ही वापसी शुरू कर सकता है। 2025 में भी मानसून निर्धारित समय से कुछ दिन पहले पीछे हटना शुरू हो गया था। ऐसे में सितंबर में बारिश के लिए उपलब्ध समय सीमित होता जा रहा है, जिससे देश के बारिश की कमी वाले हिस्सों में पर्याप्त सुधार करना मुश्किल हो सकता है।
1–10 सितंबर में पूर्वी और मध्य भारत को बारिश से राहत, दक्षिण-पश्चिम में चिंता
इस समय पश्चिम बंगाल, ओडिशा और झारखंड के ऊपर बना निम्न दबाव क्षेत्र मानसून के लिए एकमात्र राहत की उम्मीद है। यह सिस्टम मध्य भारत की ओर बढ़ सकता है। इसके प्रभाव से पूर्वी राज्यों, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में मध्यम से भारी बारिश होने की संभावना है। इसके आसपास की मौसम गतिविधियों का असर पूर्वी राजस्थान तक भी पहुंच सकता है, लेकिन वहां बारिश का दौर केवल कुछ दिनों तक सीमित रहने की उम्मीद है। 1 से 10 सितंबर के बीच देश के कुछ चुनिंदा हिस्सों में मानसून सक्रिय रह सकता है। हालांकि दक्षिणी हिस्सों और देश के अत्यधिक पश्चिमी सीमा वाले राज्यों में बारिश की कमी दूर होने की संभावना कम है। इन क्षेत्रों को सितंबर में भी बारिश की कमी का सामना करना पड़ सकता है।
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