अरब सागर में बना निम्न दबाव क्षेत्र, डिप्रेशन में बदलने की संभावना, भारतीय तट असर की संभावना कम
मुख्य मौसम बिंदु
- इस साल मानसून की वापसी के बाद अरब सागर में पहला मौसमी सिस्टम बना है।
- निम्न दबाव क्षेत्र डिप्रेशन और गहरे डिप्रेशन में बदल सकता है।
- 29–30°C समुद्री तापमान सिस्टम को मजबूत होने के लिए ऊर्जा दे सकता है।
- सिस्टम के भारतीय तट के करीब आने की संभावना बहुत कम है।
- पूर्वानुमान की वैधता: अगले 36 घंटों में सिस्टम की दिशा और तीव्रता पर विशेष नजर जरूरी है। इसके बाद भी खतरा स्पष्ट होने तक निगरानी जारी रहनी चाहिए।
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दक्षिण-पश्चिम अरब सागर में एक चिह्नित निम्न दबाव क्षेत्र बना हुआ है, जिससे जुड़ा चक्रवाती परिसंचरण वायुमंडल के मध्य स्तरों तक फैला है। यह मौसमी सिस्टम लगभग 7° उत्तरी अक्षांश और 60° पूर्वी देशांतर के आसपास स्थित है। यह अरब सागर के बाहरी हिस्से में अफ्रीकी तट के अपेक्षाकृत करीब है। इस निम्न दबाव क्षेत्र के और मजबूत होकर डिप्रेशन तथा उसके बाद गहरे डिप्रेशन में बदलने की संभावना है। इस साल अरब सागर में मानसून की वापसी के बाद बनने वाला यह पहला मौसमी सिस्टम है। इसकी आगे की दिशा और तीव्रता पर नजर रखना जरूरी होगा, क्योंकि समुद्र के ऊपर बनने वाले ऐसे सिस्टम की स्थिति समय के साथ बदल सकती है।
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समुद्र का गर्म तापमान सिस्टम को मजबूत होने में मदद कर सकता है
फिलहाल अरब सागर में बना यह निम्न दबाव क्षेत्र अनुकूल मौसमी परिस्थितियों में है। समुद्र की सतह का तापमान लगभग 29 से 30 डिग्री सेल्सियस है, जो चक्रवाती सिस्टम को ऊर्जा देने में मदद कर सकता है। इसके अलावा, ऊंचाई के साथ हवा की गति और दिशा में होने वाला बदलाव, जिसे वर्टिकल विंड शीयर कहा जाता है, फिलहाल मध्यम है। ऐसी परिस्थितियां सिस्टम को मजबूत होने के लिए कुछ समय दे सकती हैं। इसके कुछ समय तक लगभग एक ही क्षेत्र में बने रहने की संभावना है, जो इसकी तीव्रता बढ़ाने के लिए अनुकूल हो सकता है।

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हालांकि, लगभग 36 घंटे बाद इसे पश्चिम दिशा में आगे बढ़ाने वाली हवाएं प्रभावी हो सकती हैं। इसके बाद यह अपेक्षाकृत ठंडे समुद्री पानी और कम होती समुद्री ऊष्मा वाले क्षेत्र में पहुंच सकता है। इससे इसकी ताकत बढ़ने की संभावना सीमित हो सकती है। फिलहाल इसके एक महत्वपूर्ण उष्णकटिबंधीय चक्रवात में बदलने की संभावना कम आंकी गई है। अरब सागर के इस हिस्से में बनने वाले मौसमी सिस्टम आमतौर पर सोमालिया या यमन-ओमान के तट की ओर बढ़ते हैं।
भारतीय तट पर खतरा कम, फिर भी निगरानी जरूरी
समुद्र के ऊपर बनने वाले तूफानी सिस्टम कई बार अनुमान से अलग व्यवहार करते हैं। उनकी दिशा और तीव्रता में बदलाव हो सकता है, इसलिए केवल शुरुआती पूर्वानुमान के आधार पर उन्हें पूरी तरह सुरक्षित नहीं माना जा सकता। ऐसे सिस्टम पर तब तक लगातार नजर रखना जरूरी होता है, जब तक वे किसी तट से टकरा न जाएं या समुद्र के ऊपर ही कमजोर होकर समाप्त न हो जाएं।
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वर्तमान आकलन के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम अरब सागर में बने इस सिस्टम के भारतीय तट के करीब पहुंचने की संभावना बहुत कम है। फिर भी अगले कम से कम 36 घंटों तक इसकी दिशा, गति और तीव्रता की सावधानीपूर्वक निगरानी जरूरी है। इसके डिप्रेशन बनने के बाद भी इसे ट्रैक करना होगा, जब तक यह स्पष्ट न हो जाए कि भारतीय तट के लिए इसका कोई खतरा नहीं है।















