बंगाल की खाड़ी में गहरा दबाव, पूर्वी और मध्य भारत में कई तक मूसलाधार बारिश का अलर्ट
मुख्य मौसम बिंदु
- बंगाल की खाड़ी में सीजन का पहला Deep Depression सक्रिय हुआ।ॉ
- ओडिशा, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, पंजाब और हरियाणा में भारी से अति भारी बारिश की संभावना।
- कई इलाकों में जलभराव और स्थानीय बाढ़ का खतरा बना रहेगा।
- गुजरात, मुंबई और कोंकण क्षेत्र में भारी बारिश से राहत मिलने की उम्मीद।
- मौसम पूर्वानुमाुन: यह पूर्वानुमान 28 जुलाई से 3 अगस्त 2026 तक प्रभावी है और मौसम प्रणालियों के अनुसार अपडेट किया जा सकता है।
उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी (Bay of Bengal) में बना निम्न दबाव क्षेत्र (Low Pressure Area) तेजी से मजबूत होकर पहले डिप्रेशन (Depression) और फिर गहरे दबाव (Deep Depression) में बदल गया है। फिलहाल यह सिस्टम 21.3° उत्तरी अक्षांश और 88.4° पूर्वी देशांतर के पास, पश्चिम बंगाल के डायमंड हार्बर के दक्षिण में स्थित है। इस गहरे दबाव का भीतरी हिस्सा अब ओडिशा और पश्चिम बंगाल के तटीय क्षेत्रों तक पहुंच चुका है।
इसके थोड़ा और मजबूत होने की संभावना है, लेकिन तट के बेहद करीब होने की वजह से इसके तेजी से और विकसित होने की संभावना कम है। यह इस मानसून सीजन का पहला गहरा दबाव (Deep Depression) है। इससे पहले जुलाई में दो निम्न दबाव क्षेत्र बन चुके हैं। मौसम प्रणाली धीरे-धीरे आगे बढ़ेगी और जल्द ही तट को पार करेगी। इसके प्रभाव से पूर्वी और मध्य भारत में भारी से अति भारी बारिश होने की संभावना है। यह बारिश धीरे-धीरे उत्तर भारत के मैदानी इलाकों तक भी पहुंचेगी।

सैटेलाइट इमेज, Himawari
शियर ज़ोन के साथ आगे बढ़ेगा सिस्टम, होगी तेज बारिश
देश के मध्य भाग में लगभग 22° उत्तरी अक्षांश के आसपास ईस्ट-वेस्ट शियर ज़ोन बना हुआ है, जो दक्षिण राजस्थान से गंगा के मैदानी पश्चिम बंगाल तक फैला है। गहरा दबाव इसी शियर ज़ोन के साथ आगे बढ़ेगा। इसके कारण इस सप्ताह अलग-अलग समय पर ओडिशा, पश्चिम बंगाल, झारखंड, छत्तीसगढ़, विदर्भ, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और चंडीगढ़ में भारी बारिश होने की संभावना है। इस पूरे मार्ग में कई स्थानों पर अति भारी बारिश (Very Heavy Rainfall) भी हो सकती है। तेज बारिश के कारण कुछ इलाकों में जलभराव, स्थानीय बाढ़, यातायात प्रभावित होने और सामान्य जनजीवन बाधित होने की आशंका है।

उत्तर-पश्चिम भारत में बढ़ेगा बारिश का खतरा
अच्छी बात यह है कि यह मौसम प्रणाली मध्य प्रदेश के मध्य भाग तक पहुंचने के बाद थोड़ा उत्तर की ओर मुड़ जाएगी। इससे उन इलाकों को राहत मिलेगी जहां पिछले सप्ताह अत्यधिक बारिश और बाढ़ जैसी स्थिति बनी हुई थी। कोंकण तट, उत्तर मध्य महाराष्ट्र और पूरे गुजरात में अब भारी बारिश की संभावना काफी कम है। हाल के दिनों में भीषण बारिश झेल चुके गुजरात को इस सिस्टम से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। मुंबई में भी फिलहाल भारी बारिश की संभावना नहीं है। वहीं पश्चिमी राजस्थान के सीमावर्ती क्षेत्रों पर भी इस सिस्टम का असर कम रहेगा। लेकिन पूर्वी और उत्तरी राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड की तराई और हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश और बाढ़ जैसी स्थिति बनने का खतरा रहेगा।
दक्षिण भारत में बारिश की कमी बनी रहेगी
जहां एक ओर पूर्वी, मध्य और उत्तर भारत में बारिश का दौर तेज होगा, वहीं दक्षिण भारत में मानसून कमजोर बना रहेगा। अगले एक सप्ताह तक दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में बारिश की कमी दूर होने के संकेत नहीं हैं। तटीय कर्नाटक, केरल और गोवा को छोड़कर अधिकांश दक्षिणी राज्यों में सामान्य से काफी कम बारिश जारी रह सकती है। पहले से 30% से अधिक वर्षा की कमी वाले क्षेत्रों में यह घाटा और बढ़ने की संभावना है।
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