साप्ताहिक मौसम विश्लेषण: मानसून का घाटा बरकरार, बंगाल की खाड़ी में नए सिस्टम और El Niño पर नजर

By: Arti Kumari | Edited By: Mohini Sharma
Aug 11, 2026, 7:30 PM
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मुख्य मौसम बिंदु

  • देश में मानसून की कमी करीब 11% है, लेकिन बारिश का वितरण असमान है।
  • मध्य भारत और पश्चिमी हिमालय में बारिश का जोर बना हुआ है।
  • 12-13 अगस्त को बंगाल की खाड़ी में नया निम्न दबाव बन सकता है।
  • El Niño मजबूत होने की ओर, जबकि Positive IOD के संकेत भी उभर रहे हैं।
  • Forecast Validity: आकलन 10 अगस्त 2026 से आने वाले सप्ताह और मानसून के दूसरे हिस्से के रुझान के लिए है।

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अगस्त के मध्य तक पहुंचते-पहुंचते देश में मानसून की स्थिति थोड़ी सुधरी है, लेकिन तस्वीर अभी भी पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है। देशभर में बारिश की कमी घटकर करीब 11% रह गई है। हालांकि, यह सुधार सभी क्षेत्रों में एक जैसा नहीं है। कहीं अच्छी बारिश हो रही है तो कहीं अब भी बारिश की कमी बनी हुई है। फिलहाल मध्य भारत और पश्चिमी हिमालय बारिश के प्रमुख केंद्र बने हुए हैं। वहीं, बंगाल की खाड़ी में बन रहा नया मौसम सिस्टम आने वाले दिनों में बारिश का फोकस पूर्वी भारत की ओर कर सकता है।

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मध्य भारत में हाल की बारिश के कारण मौसम सक्रिय बना हुआ है। मध्य प्रदेश इस समय प्रमुख बारिश वाले क्षेत्रों में शामिल है। यहां मध्यम से भारी बारिश जारी रह सकती है। हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़, ओडिशा, तटीय कर्नाटक और केरल में हल्की से मध्यम बारिश के साथ कुछ स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है। उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, झारखंड, पश्चिम बंगाल, कोंकण-गोवा, विदर्भ और उत्तर गुजरात में भी हल्की से मध्यम बारिश के आसार हैं। दिल्ली में अगले 24 घंटों में हल्की बारिश हो सकती है, जबकि 11 अगस्त को कुछ हिस्सों में बारिश की तीव्रता बढ़ने और लंबे समय तक बारिश होने की संभावना जताई गई है।

बंगाल की खाड़ी में नया निम्न दबाव, बारिश का फोकस बदल सकता है

अब मौसम की नजर उत्तर-पश्चिमी बंगाल की खाड़ी पर है। यहां एक चक्रवाती परिसंचरण पहले से बना हुआ है। इसके प्रभाव से 12-13 अगस्त के आसपास नया निम्न दबाव क्षेत्र बनने की संभावना है। अलग-अलग आकलनों में इसके बनने के समय में थोड़ा अंतर है, इसलिए फिलहाल 12 से 13 अगस्त को इसका संभावित समय माना जा रहा है। इस नए सिस्टम की ताकत और यह किस दिशा में आगे बढ़ता है, इसी पर निर्भर करेगा कि पूर्वी और मध्य भारत में बारिश कितनी बढ़ती है। फिलहाल इस सिस्टम के बनने की संभावना को लेकर भरोसा ज्यादा है, लेकिन आने वाले कई दिनों के लिए अलग-अलग जिलों में बारिश की सटीक मात्रा और समय बताना अभी मुश्किल है।

बारिश से जलाशयों में सुधार, लेकिन पानी की स्थिति हर जगह समान नहीं

हाल की मानसूनी बारिश से देश के कई हिस्सों में जलाशयों में पानी की आवक बढ़ी है। 6 अगस्त 2026 तक केंद्रीय जल आयोग की निगरानी वाले 166 जलाशयों में लाइव स्टोरेज 96.966 अरब घन मीटर था। यह इन जलाशयों की कुल लाइव स्टोरेज क्षमता का 52.82% है। 30 जुलाई को यह आंकड़ा 81.479 अरब घन मीटर यानी 44.39% था। हालांकि पिछले साल इसी समय इन जलाशयों में 132.368 अरब घन मीटर पानी था, इसलिए इस साल भंडारण अभी भी काफी पीछे है।

क्षेत्रों के बीच भी बड़ा अंतर है। पश्चिमी क्षेत्र में जलाशयों का भंडारण पिछले साल से थोड़ा बेहतर है। यहां क्षमता का 75.86% पानी है, जबकि पिछले साल यह 73.76% था। इसके विपरीत मध्य क्षेत्र में यह 47.38%, पूर्वी क्षेत्र में 47.19%, उत्तरी क्षेत्र में 45.80% और दक्षिणी क्षेत्र में 46.47% है। इन सभी क्षेत्रों में पिछले साल की तुलना में भंडारण कम है।

हालांकि सिर्फ देश के कुल जलाशय आंकड़े से पानी की पूरी स्थिति समझना सही नहीं होगा। किसी नदी घाटी में अच्छी बारिश होने पर एक जलाशय तेजी से भर सकता है, जबकि दूसरे जलाशय में पानी की कमी बनी रह सकती है। बाढ़ नियंत्रण वाले जलाशयों में भारी बारिश के दौरान पानी जानबूझकर छोड़ा भी जा सकता है, ताकि आगे आने वाली बाढ़ के लिए जगह बनी रहे। इसलिए खेती, बिजली उत्पादन और जल प्रबंधन के लिए बारिश, जलाशय में पानी की आवक, भंडारण और पानी छोड़े जाने की स्थिति को अलग-अलग देखना जरूरी है।

El Niño का असर बढ़ने की चिंता, Positive IOD पर भी नजर

मानसून के दूसरे हिस्से में अब El Niño पर भी खास नजर रखनी होगी। प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्सों में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से अधिक बना हुआ है। तापमान का यह पैटर्न अब धीरे-धीरे Canonical यानी Eastern Pacific El Niño जैसा दिखाई देने लगा है।

22 जून से 3 अगस्त के बीच पश्चिमी प्रशांत के Niño 4 क्षेत्र में तापमान की विसंगति +0.8°C से घटकर +0.2°C हुई। इसके विपरीत पूर्वी प्रशांत के Niño 1+2 क्षेत्र में यह +2.1°C से बढ़कर +3.2°C हो गई। El Niño पर नजर रखने वाले प्रमुख Niño 3.4 क्षेत्र में भी तापमान 29 जून के +1.2°C से बढ़कर 3 अगस्त को +1.5°C हो गया। यह स्तर मजबूत El Niño से जुड़ी तापमान सीमा तक पहुंचता है, लेकिन अभी इसे मजबूत El Niño पूरी तरह स्थापित नहीं माना जा सकता। इसके लिए यह स्थिति कई सप्ताह तक बनी रहनी जरूरी है।

पूर्वी प्रशांत में तेजी से बढ़ती गर्मी और पश्चिमी हिस्से में अपेक्षाकृत ठंडक का यह अंतर Canonical El Niño की ओर संकेत कर रहा है। ऐसे El Niño में वायुमंडलीय परिसंचरण में ज्यादा बदलाव हो सकता है और ऐतिहासिक रूप से इसका संबंध मध्य, पश्चिमी और उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में बारिश की कमी और अधिक उतार-चढ़ाव से रहा है। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र के मराठवाड़ा और विदर्भ, गुजरात के सौराष्ट्र-कच्छ, राजस्थान, उत्तर प्रदेश तथा हरियाणा-दिल्ली क्षेत्र को इस तरह के पैटर्न में अधिक बारिश की अनिश्चितता का सामना करना पड़ सकता है। बिहार, झारखंड, ओडिशा और दक्षिणी प्रायद्वीप के कुछ अंदरूनी हिस्सों में भी सामान्य से कम बारिश का जोखिम रह सकता है।

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हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि इन क्षेत्रों में लगातार सूखा रहेगा। अभी मध्य भारत में हो रही तेज बारिश इसका उदाहरण है कि कुल सीजन में बारिश की कमी का जोखिम होने के बावजूद बीच-बीच में बहुत तेज बारिश के दौर आ सकते हैं। इसलिए मानसून के दूसरे हिस्से में मौसम पर लगातार नजर रखना जरूरी होगा।

इसी बीच IOD यानी Indian Ocean Dipole भी सकारात्मक दिशा में बढ़ रहा है। 2 अगस्त को समाप्त सप्ताह में IOD इंडेक्स +0.63°C रहा, जो +0.4°C की सकारात्मक सीमा से ऊपर है। हालांकि इसे Positive IOD की स्थापित स्थिति मानने के लिए यह स्तर कई और सप्ताह तक बना रहना जरूरी है। मौसम मॉडल सितंबर तक Positive IOD बनने के संकेत दे रहे हैं। आने वाले समय में इसकी ताकत और समय El Niño के साथ मिलकर मानसून के दूसरे हिस्से के लिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

MJO से फिलहाल ज्यादा मदद नहीं, बिजली क्षेत्र के लिए मौसम पूर्वानुमान अहम

MJO यानी Madden-Julian Oscillation फिलहाल कमजोर है। इसके आगे पूर्व की ओर बढ़कर फिर मजबूत होने की संभावना है, लेकिन मौजूदा स्थिति भारतीय समुद्री क्षेत्र के बजाय पश्चिमी प्रशांत में गतिविधियों को ज्यादा समर्थन दे रही है। साथ ही El Niño से जुड़ी तेज हवाओं की स्थिति भी भारतीय क्षेत्र में मजबूत मानसूनी सिस्टम बनने में व्यापक मदद नहीं कर रही है।

मौसम का असर अब बिजली क्षेत्र पर भी तेजी से दिखाई दे रहा है। भारत में सौर और अन्य नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता बढ़ने के कारण मौसम का छोटी अवधि का पूर्वानुमान बिजली उत्पादन और मांग दोनों के लिए महत्वपूर्ण हो गया है। दिन में तेज धूप होने पर सौर बिजली का उत्पादन काफी बढ़ सकता है, लेकिन सूर्य ढलने के बाद यह उत्पादन तेजी से कम हो जाता है, जबकि शाम के समय बिजली की मांग बनी रह सकती है। बारिश और कम तापमान दिन में एसी जैसी कूलिंग की मांग घटा सकते हैं, लेकिन इससे शाम के समय बिजली की कमी का दबाव जरूरी नहीं घटता।

10 अगस्त को बिजली बाजार में औसत कीमत ₹3.772 प्रति यूनिट रही और कीमत ₹1.111 से ₹10 प्रति यूनिट के बीच रही। शाम 7 बजे से रात 11 बजे तक कीमत ₹10 प्रति यूनिट की ऊपरी सीमा पर बनी रही। यह शाम के समय बिजली बाजार में दबाव को दिखाता है, लेकिन इसका मतलब पूरे देश में बिजली की कमी नहीं है। 31 जुलाई 2026 तक भारत की गैर-जीवाश्म बिजली उत्पादन क्षमता 300.50 GW पहुंच गई थी, जो कुल स्थापित क्षमता का 54% से अधिक है। इसमें सौर, पवन, जलविद्युत, बायो-पावर और परमाणु ऊर्जा शामिल हैं।

आगे क्या रहेगा मौसम का रुख?

आने वाले दिनों में मध्य भारत और पश्चिमी हिमालय बारिश के प्रमुख क्षेत्र बने रह सकते हैं। वहीं 12-13 अगस्त के आसपास बंगाल की खाड़ी में बनने वाला नया निम्न दबाव क्षेत्र पूर्वी और आसपास के मध्य भारत में बारिश का वितरण बदल सकता है।

इसके आगे मानसून के दूसरे हिस्से में Canonical El Niño का बढ़ता संकेत महत्वपूर्ण रहेगा। संभावित Positive IOD भी मानसून के आगे के पूर्वानुमान में एक और महत्वपूर्ण कारक होगा। हाल की बारिश से जलाशयों में पानी जरूर बढ़ा है, लेकिन अलग-अलग नदी घाटियों की स्थिति एक जैसी नहीं है। इसी तरह नवीकरणीय ऊर्जा के बढ़ते इस्तेमाल के कारण मौसम में छोटे बदलाव भी अब बिजली उत्पादन और मांग पर ज्यादा असर डाल सकते हैं। इसलिए आने वाले समय में सिर्फ देशभर की कुल बारिश नहीं, बल्कि बारिश का वितरण, समुद्री-वायुमंडलीय सिस्टम, पानी की उपलब्धता और बिजली की मांग—इन सभी को साथ में देखना जरूरी होगा।

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Arti Kumari
Content Writer (English)
With a strong foundation in science and a passion for research, Arti specializes in weather and climate communication. At Skymet Weather, she leads the company's digital content strategy, transforming complex meteorological data into clear, engaging narratives. Her research-backed storytelling has helped expand Skymet's digital reach while making weather and climate information accessible to millions of readers across India and beyond.
FAQ

देश में बारिश की कमी घटकर करीब 11% रह गई है, लेकिन सभी क्षेत्रों में बारिश समान नहीं हुई है। मध्य भारत और पश्चिमी हिमालय में बारिश का जोर है, जबकि कई अन्य क्षेत्रों में कमी बनी हुई है।

उत्तर-पश्चिमी बंगाल की खाड़ी में बने चक्रवाती परिसंचरण के प्रभाव से 12-13 अगस्त के आसपास नया निम्न दबाव बनने की संभावना है। इसकी ताकत और दिशा तय करेगी कि पूर्वी और मध्य भारत में बारिश कितनी बढ़ेगी।

El Niño का पैटर्न मजबूत होने के संकेत दे रहा है। खासकर पूर्वी प्रशांत में बढ़ती गर्मी Canonical El Niño जैसी स्थिति दिखा रही है। ऐसे पैटर्न में मध्य, पश्चिमी और उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में बारिश की अनिश्चितता और कमी का जोखिम बढ़ सकता है।

डिस्क्लेमर: डिस्कलेमर- यह विश्लेषण स्काइमेट के मौसम संबंधी आंकड़ों, आंतरिक पूर्वानुमान मॉडल, मौसम केंद्रों से प्राप्त जानकारी, जलवायु संबंधी डेटा और स्काइमेट की मौसम विशेषज्ञ टीम के आकलन पर आधारित है। सटीक जानकारी देने का पूरा प्रयास किया गया है, लेकिन मौसम लगातार बदलने वाली प्राकृतिक प्रक्रिया है, इसलिए परिस्थितियां समय के साथ बदल सकती हैं। यह जानकारी केवल सामान्य सूचना के उद्देश्य से दी गई है और इसे अंतिम या पूरी तरह निश्चित मौसम पूर्वानुमान नहीं माना जाना चाहिए।

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