उत्तराखंड-हिमाचल में समय से पहले बर्फबारी, दिल्ली-पंजाब-हरियाणा में बढ़ी ठंडक, जानें पूरा मौसम पूर्वानुमान

By: AVM GP Sharma | Edited By: Mohini Sharma
Sep 28, 2026, 1:54 PM
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मुख्य मौसम बिंदु

  • जम्मू-कश्मीर और हिमाचल में आज भी मौसम की गतिविधियां जारी रह सकती हैं।
  • हिमाचल के किन्नौर और लाहौल-स्पीति समेत ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सीजन की पहली बर्फबारी हुई।
  • उत्तराखंड के गढ़वाल और कुमाऊं में भी पहली बर्फबारी हुई, हेमकुंड साहिब में करीब आधा फीट बर्फ।
  • पहाड़ों से चली ठंडी हवाओं के कारण दिल्ली, पंजाब और हरियाणा में तापमान में गिरावट।
  • पूर्वानुमान वैधता: यह पूर्वानुमान 28 सितंबर से 30 सितंबर 2026 तक मान्य है। इस दौरान पश्चिमी विक्षोभ या किसी नए मौसम सिस्टम के विकसित होने पर परिस्थितियों में बदलाव संभव है।

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पश्चिमी विक्षोभ ने वीकेंड के दौरान उत्तर भारत के पहाड़ी क्षेत्रों को पार किया है। हालांकि, इस सिस्टम का बचा हुआ असर अभी भी बना हुआ है और इसके पीछे एक और ऊपरी हवा की ट्रफ सक्रिय है। इसके चलते आज जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में मौसम की गतिविधियां जारी रहेंगी। पंजाब और हरियाणा के मैदानी इलाकों, खासकर पहाड़ों की तलहटी वाले क्षेत्रों में बादल छाए रह सकते हैं और कुछ स्थानों पर बारिश की बौछारें पड़ सकती हैं। वहीं, उत्तराखंड के तलहटी, मध्य और ऊंचाई वाले इलाकों में भी अगले 24 घंटों के दौरान बादल और छिटपुट बारिश देखने को मिल सकती है। कल, 29 सितंबर के आखिर तक मौसम में सुधार शुरू हो जाएगा और सप्ताह के बाकी दिनों में पहाड़ों से लेकर मैदानी इलाकों तक मौसम साफ और अच्छा रहने की संभावना है।

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हिमाचल और उत्तराखंड में सीजन की पहली बर्फबारी

हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के मध्य और ऊंचाई वाले इलाकों में इस सीजन की पहली बर्फबारी 26 सितंबर को हुई थी। हिमाचल के किन्नौर क्षेत्र में 8,000 से 20,000 फीट की ऊंचाई वाले इलाकों में पहली बर्फ पड़ी। वहीं, तिब्बत सीमा के पास आखिरी गांवों में से एक कूनो-चिरांग भी बर्फ की सफेद चादर से ढक गया। लाहौल-स्पीति घाटी में 12,000 से 14,000 फीट की ऊंचाई पर सीजन की पहली बर्फबारी हुई। डुमती जाने वाले मार्ग पर चितकुल में करीब 3 इंच बर्फ दर्ज की गई, जो इस समय के लिहाज से काफी जल्दी है। उत्तराखंड में भी गढ़वाल और कुमाऊं के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सीजन की पहली बर्फबारी हुई है। गौरतलब है, हेमकुंड साहिब में भी करीब आधा फीट बर्फ गिरी है। केदारनाथ धाम और बद्रीनाथ-सतोपंथ ट्रेकिंग रूट के बड़े हिस्से में भी समय से पहले बर्फबारी हुई। साथ ही चमोली जिले के ऊंचे इलाकों में भी पहली बर्फबारी दर्ज हुई। खराब मौसम और सुरक्षा को देखते हुए चारधाम यात्रा को अस्थायी रूप से रोक दिया गया है और रास्ते में भूस्खलन वाले क्षेत्रों से लोगों को सुरक्षित निकाला गया।

पहाड़ों से चली ठंडी हवाओं से मैदानी इलाकों में बढ़ी ठंडक

पहाड़ों से नीचे की ओर चलने वाली ठंडी हवाओं ने पंजाब, हरियाणा और दिल्ली के मैदानी इलाकों में भी मौसम में हल्की ठंडक बढ़ा दी है। दिल्ली में सितंबर के दौरान न्यूनतम तापमान 21°C तक पहुंच गया, जो करीब 18 साल बाद इतना कम रहा है। उत्तर भारत के पहाड़ी क्षेत्रों की तलहटी और मैदानी हिस्सों में भी इसी तरह का तापमान दर्ज किया गया। पश्चिमी विक्षोभ के कल, 29 सितंबर तक पहाड़ों से आगे निकल जाने की संभावना है। इसके बाद मौसम साफ होगा, लेकिन पहाड़ों से आने वाली ठंडी हवाओं के कारण हल्की ठंडक अगले दो दिनों तक बनी रह सकती है। वीकेंड के आसपास यह ठंडक धीरे-धीरे कम हो जाएगी। सप्ताह के बाकी दिनों में जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों के साथ पंजाब, हरियाणा और दिल्ली समेत उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में मौसम साफ और शुष्क रहने की संभावना है।

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AVM GP Sharma
President of Meteorology & Climate Change
AVM Sharma, President of Meteorology & Climate Change at Skymet Weather Services, is a retired Indian Air Force officer who previously led the Meteorological Branch at Air Headquarters in New Delhi. With over a decade of experience at Skymet, he brings a wealth of knowledge and expertise to the organization.
FAQ

किन्नौर और लाहौल-स्पीति समेत ऊंचाई वाले इलाकों में सीजन की पहली बर्फबारी हुई। चितकुल में करीब 3 इंच बर्फ दर्ज की गई।

गढ़वाल और कुमाऊं के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में पहली बर्फबारी हुई। हेमकुंड साहिब, केदारनाथ और चमोली के ऊंचे इलाकों में भी बर्फबारी हुई।

पहाड़ों पर बर्फबारी के बाद वहां से ठंडी हवाएं मैदानी इलाकों की ओर चलीं। इससे दिल्ली, पंजाब और हरियाणा में तापमान गिरा और हवा में हल्की ठंडक बढ़ी।

डिस्क्लेमर: डिस्कलेमर- यह विश्लेषण स्काइमेट के मौसम संबंधी आंकड़ों, आंतरिक पूर्वानुमान मॉडल, मौसम केंद्रों से प्राप्त जानकारी, जलवायु संबंधी डेटा और स्काइमेट की मौसम विशेषज्ञ टीम के आकलन पर आधारित है। सटीक जानकारी देने का पूरा प्रयास किया गया है, लेकिन मौसम लगातार बदलने वाली प्राकृतिक प्रक्रिया है, इसलिए परिस्थितियां समय के साथ बदल सकती हैं। यह जानकारी केवल सामान्य सूचना के उद्देश्य से दी गई है और इसे अंतिम या पूरी तरह निश्चित मौसम पूर्वानुमान नहीं माना जाना चाहिए।

Skymet भारत की सबसे बेहतर और सटीक निजी मौसम पूर्वानुमान और जलवायु इंटेलिजेंस कंपनी है, जो देशभर में विश्वसनीय मौसम डेटा, मानसून अपडेट और कृषि जोखिम प्रबंधन समाधान प्रदान करती है