पश्चिम बंगाल-ओडिशा पर बना निम्न दबाव, पूरे सप्ताह पूर्वी-मध्य भारत में सक्रिय रहेगा मानसून, जानें अपने राज्य का मौसम
मुख्य मौसम बिंदु
- कम दबाव सिस्टम ओडिशा, झारखंड और छत्तीसगढ़ होते हुए एमपी की ओर बढ़ेगा।
- 2-3 सितंबर को पूर्वी मध्य प्रदेश, बिहार और झारखंड में तेज मौसम गतिविधियां संभावित।
- 4-6 सितंबर को पूरे एमपी, विदर्भ और पूर्वी राजस्थान के कुछ हिस्सों में बारिश का असर।
- राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, मराठवाड़ा, पश्चिमी तट और दक्षिणी प्रायद्वीप में मानसून कमजोर ।
- पूर्वानुमान वैधता: यह पूर्वानुमान 1 सितंबर से 7 सितंबर 2026 तक की मौसम गतिविधियों को कवर करता है।
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उत्तर-पश्चिमी बंगाल की खाड़ी के ऊपर बना निम्न दबाव क्षेत्र अब समुद्र से आगे बढ़कर जमीन पर आ गया है। फिलहाल यह गंगीय पश्चिम बंगाल, उत्तरी ओडिशा और उससे सटे बंगाल की खाड़ी के हिस्सों पर एक Well-Marked Low Pressure Area के रूप में बना हुआ है। यह सिस्टम अगले दो दिनों के दौरान ओडिशा, झारखंड और छत्तीसगढ़ होते हुए पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ेगा। इसके बाद इसके मध्य प्रदेश और उससे सटे उत्तर प्रदेश के हिस्सों से होकर आगे बढ़ने की संभावना है। इसके प्रभाव से देश के पूर्वी और मध्य भागों में मानसून सक्रिय से जोरदार हो सकता है। बारिश का असर पूर्वी राजस्थान के सीमावर्ती हिस्सों तक पहुंच सकता है और गुजरात में भी कुछ जगहों पर बारिश की गतिविधि दस्तक दे सकती है।
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सैटेलाइट इमेज, Himawari
2-3 सितंबर को पूर्वी MP, बिहार और झारखंड में तेज बारिश
गंगीय पश्चिम बंगाल, उत्तरी ओडिशा, झारखंड, दक्षिणी बिहार और छत्तीसगढ़ में आज से ही मौसम गतिविधियां शुरू हो जाएंगी। कल तक बारिश का प्रभाव पूर्वी मध्य प्रदेश तक पहुंच सकता है। 2 और 3 सितंबर को मौसम की सबसे तेज गतिविधियां पूर्वी मध्य प्रदेश, बिहार और झारखंड में केंद्रित रहने की संभावना है। इस दौरान पूर्वी उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती हिस्सों और विदर्भ में भी बारिश का असर पहुंच सकता है। इसके बाद 4 से 6 सितंबर के बीच पूरे मध्य प्रदेश के साथ उत्तर प्रदेश से लगे सीमावर्ती क्षेत्र, विदर्भ और पूर्वी राजस्थान में एक-दो दिनों तक बारिश की गतिविधियां जारी रह सकती हैं।
दक्षिण भारत में कमजोर मानसून, देश का बारिश घाटा आगे बढ़ सकता है
अगले एक सप्ताह के दौरान पश्चिमी राजस्थान, गुजरात, मध्य महाराष्ट्र, मराठवाड़ा, पश्चिमी तट और दक्षिणी प्रायद्वीप में मानसून की गतिविधियां कमजोर से बहुत कमजोर रहने की संभावना है। इसके कारण दक्षिणी हिस्सों में बारिश की कमी और बढ़ सकती है। फिलहाल दक्षिण भारत में बारिश का घाटा 24% है। इसके विपरीत, देश के मध्य हिस्सों में बारिश की कमी अभी 4% है और इसमें कुछ सुधार हो सकता है। उत्तर-पश्चिम भारत में बारिश की स्थिति लगभग यथावत रहने की उम्मीद है। पूर्वोत्तर भारत में कहीं-कहीं बारिश और गरज-चमक के बावजूद बारिश की कमी और बढ़ सकती है। पूरे देश में इस समय 14% बारिश की कमी है, जो सितंबर के पहले 10 दिनों में मामूली तौर पर 1-2% कम हो सकती है, लेकिन इसके बाद बारिश की कमी फिर धीरे-धीरे बढ़ने की संभावना है।
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