दक्षिण-पश्चिम मॉनसून 2020 का अब इंतज़ार शुरू हो गया है। इस बीच समुद्र और वायुमंडल में इस समय जो स्थितियाँ हैं वो इशारा कर रही हैं कि केरल में मॉनसून एक्सप्रेस अपने निर्धारित समय से दो दिन पहले 28 मई को पहुँच सकती है। इस अनुमान में 2 दिन का त्रुटि मार्जिन भी बताया जा रहा है। यहाँ ज़िक्र करना महत्वपूर्ण है कि केरल में मॉनसून के जल्दी या देर से पहुँचने और देश बाकी हिस्सों में मॉनसून के आगमन के बीच कोई सीधा संबंध नहीं है। यानि अगर केरल में जल्दी आया है तो आपके शहर में भी मॉनसून जल्दी ही पहुंचेगा इसकी कोई गारंटी नहीं है।
लंबे समय बाद मॉनसून के आगमन की तारीखों को संशोधित किया गया है। यह संशोधन 1960-2019 के बीच देश में मॉनसून के आगमन और प्रगति के आधार पर किया गया है। अंडमान सागर पर पहले मॉनसून के आगमन की सामान्य तारीख 20 मई थी, इसमें दो दिनों का बदलाव किया गया है। यानि अंडमान सागर पर अब मॉनसून का आगमन 22 मई को होगा। हालांकि केरल में मॉनसून के दस्तक देने की तारीख नहीं बदली गई है, इसे 1 जून ही रखा गया है। मध्य भारत के अधिकांश हिस्सों में मॉनसून के आगमन की डेट को 3-7 दिन पीछे किया गया है जबकि उत्तर-पश्चिम भारत में लगभग एक सप्ताह पहले मॉनसून के आगाज का समय किया गया है।
बंगाल की खाड़ी में उठ रहा तूफान जल्दी लाएगा मॉनसून
बंगाल की खाड़ी में एक प्रभावित मौसमी सिस्टम बन गया है, इसके जल्द तूफान बनने की संभावना है। यही सिस्टम मॉनसून करंट को तेज़ करने में अपनी भूमिका निभाएगा जिससे उम्मीद है कि अंडमान सागर पर 16-17 मई के आसपास 2020 का मॉनसून दस्तक दे देगा। बंगाल की खाड़ी में संभावित तूफान का प्रभाव खत्म होने में कम से कम 5 दिन का वक्त लगेगा। जब यह सिस्टम प्रभावी होगा, उस दौरान भारत के दोनों तटों यानि बंगाल की खाड़ी से सटे पूर्वी तट और अरब सागर से सटे पश्चिमी तट पर हवाएँ मॉनसून के अनुकूल रहेगा।
हालांकि समुद्री तूफान के आगे बढ़ने बाद दोनों ओर समुद्र तटीय भागों में कुछ समय के लिए मॉनसून करंट सुस्त हो जाएगी। संभवतः कुछ दिनों के लिए प्रायद्वीपीय भारत के अधिकांश हिस्सों में मॉनसून की गतिविधियां काफी कम हो सकती हैं।
केरल में मॉनसून के आगमन की औपचारिक घोषणा कुछ निश्चित मापदण्डों के आधार पर की जाती है। इसमें हवा की दिशा और उसकी गति के अलावा ओएलआर और निर्धारित 14 स्टेशनों पर निरंतर बारिश शामिल है।
English version: The expected onset of Southwest Monsoon 2020 over Kerala on May 28
हवाओं की दिशा में बदलाव एक महत्वपूर्ण मापदंड है। जब पश्चिमी हवा भूमध्य रेखा के पास से 600 hPa पर चलने लगती है और 5 डिग्री से 10 डिग्री उत्तरी अक्षांश तथा 70 से 80 डिग्री पूर्वी देशांतर क्षेत्र में हवाओं की रफ्तार 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की होती है। तब माना जाता है कि मॉनसून आ गया है।
ओएलआर: आउटगोइंग लॉन्गवेब रेडिएशन यानी ओ एल आर भी एक प्रमुख कारण है। ओएलआर 5 डिग्री से 10 डिग्री उत्तरी अक्षांश और 70 से 75 डिग्री पूर्वी देशांतर के पास 200 mw2 के आस-पास होता है तब माना जाता है कि मॉनसून का आगमन हो गया है।
बारिश: इनमें सबसे महत्वपूर्ण मापदंड है मॉनसून के आने से पहले बारिश का बढ़ना और इसके लिए निर्धारित नियमों के अनुसार 10 मई के बाद केरल, कर्नाटक और लक्षद्वीप के पूर्व निर्धारित 14 स्थानों मिनिकॉय, अमीनी दिवी, तिरुअनंतपुरम, पुनल्लूर, कोल्लम, अलप्पुझा, कोट्टायम, कोची, थ्रिसूर, कोझिकोड, थालसरी, कन्नूर, कुडलू और बंगलुरु में 60% से अधिक स्थानों पर लगातार दो या दो से अधिक दिन 2.5 मिलीमीटर या उससे अधिक बारिश होना।
जब उपर्युक्त मापदण्ड पूरे होते हैं तभी केरल में मॉनसून के आगमन की घोषणा की जाती है।
केरल में मॉनसून अपने निर्धारित समय से 7 दिन आगे-पीछे आता रहा है। 99% मौकों पर मॉनसून का केरल में आगमन 25 मई से 08 जून के बीच हुआ है। पिछले 10 वर्षों में, 2009 ऐसा पहला मौका है मॉनसून सबसे पहले 23 मई को केरल पहुंचा और सबसे अधिक देरी 2016 में जब मॉनसून ने 8 जून को केरल में दस्तक दी।
Image credit: The Week
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