उत्तराखंड में कल मूसलाधार बारिश, मध्य सप्ताह तक भारी बरसात का अलर्ट, जानें आपने जिले का मौसम
मुख्य मौसम बिंदु
- उत्तराखंड में अगले दो दिनों तक भारी बारिश की संभावना है।
- कुमाऊं मंडल के फुटहिल्स और निचली पहाड़ियों में बारिश का खतरा ज्यादा रहेगा।
- पंतनगर, रुद्रपुर, ऊधम सिंह नगर, देहरादून, नैनीताल, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़ और बागेश्वर समेत कई इलाके प्रभावित हो सकते हैं।
- मानसून ट्रफ के हिमालय की तलहटी के करीब रहने से अचानक तेज बारिश और लैंडस्लाइड का खतरा बढ़ सकता है।
- पूर्वानुमान की वैधता: 10 से 16 अगस्त 2026 तक, बारिश की गतिविधि अगले सप्ताह तक भी जारी रहने की संभावना है।
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उत्तराखंड में अगले दो दिनों के दौरान भारी बारिश होने की संभावना है। बुधवार को बारिश की तीव्रता कुछ कम हो सकती है, लेकिन इसके बाद फिर से बारिश की गतिविधियां बढ़ेंगी और पूरे सप्ताह रुक-रुककर जारी रहने के आसार हैं। राज्य के फुटहिल्स यानी मैदानी इलाकों से लगे निचले हिस्सों और निचली पहाड़ियों में मौसम ज्यादा खराब रह सकता है। खासकर कुमाऊं मंडल में भारी बारिश का खतरा अधिक है।
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भारी बारिश के लिहाज से पंतनगर, रुद्रपुर, ऊधम सिंह नगर और देहरादून समेत आसपास के इलाकों पर नजर रहेगी। कुमाऊं की निचली और मध्यम ऊंचाई वाली पहाड़ियों में नैनीताल, रामपुर, अल्मोड़ा, रानीखेत, पिथौरागढ़, चंपावत, बागेश्वर और मुक्तेश्वर में भी भारी बारिश की संभावना है। वहीं गढ़वाल मंडल में कई स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश और गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ सकती हैं। इस दौरान लगातार बारिश के कारण निचले इलाकों में जलभराव और पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क तथा यातायात प्रभावित होने की स्थिति बन सकती है। खासकर ढलानों और कमजोर पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की जरूरत होगी।
पश्चिमी विक्षोभ और कम दबाव क्षेत्र मिलकर बढ़ाएंगे उत्तराखंड में बारिश
उत्तराखंड में बढ़ती बारिश के पीछे कई मौसम प्रणालियां एक साथ काम कर रही हैं। इस समय एक पश्चिमी विक्षोभ ऊपरी वायुमंडल में सक्रिय है, जो आगे बढ़ रहा है। इसके अलावा मानसून ट्रफ लगातार उत्तर-दक्षिण दिशा में अपनी स्थिति बदल रही है। इसी बीच पश्चिमी मध्य प्रदेश और उससे सटे राजस्थान व उत्तर प्रदेश के ऊपर एक कम दबाव का क्षेत्र मुख्य रूप से चक्रवाती परिसंचरण के रूप में मौजूद है।
आने वाले समय में पश्चिमी विक्षोभ और इस कम दबाव वाले क्षेत्र के बीच आपसी प्रभाव बनने की संभावना है। इसके कारण मानसून ट्रफ उत्तर की ओर खिसककर हिमालय की तलहटी के करीब पहुंच सकती है। जब मानसून ट्रफ उत्तर की ओर बढ़ती है और उत्तराखंड के करीब आती है, तो उसके आसपास के क्षेत्रों में नमी और बारिश की गतिविधि बढ़ जाती है। इसी वजह से आने वाले दिनों में उत्तराखंड में मानसून सक्रिय होने और भारी बारिश के दौर बढ़ने की संभावना है।
हिमालय की तलहटी के साथ रहेगी मानसून ट्रफ, लैंडस्लाइड का खतरा बढ़ेगा
मौसम की मौजूदा स्थिति से संकेत मिल रहे हैं कि इस सप्ताह मानसून ट्रफ जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड की तलहटी के करीब बनी रह सकती है। इसके बाद यह नेपाल की तलहटी से होते हुए बिहार तक भी फैल सकती है। जब ट्रफ इस तरह हिमालय की तलहटी के करीब रहती है, तो इसके पूरे क्षेत्र में बारिश की गतिविधियां बढ़ जाती हैं।
हालांकि, ट्रफ के लंबे क्षेत्र में हर जगह एक जैसी बारिश नहीं होती। इसके कुछ छोटे हिस्सों में बहुत सक्रिय गरज वाले बादल यानी डीप कन्वेक्टिव थंडरस्टॉर्म सेल विकसित हो सकते हैं। यही बादल कम समय में अचानक बहुत तेज बारिश और गरज-चमक जैसी चरम मौसम गतिविधियां पैदा कर सकते हैं। इसलिए बिना किसी बड़े मौसम सिस्टम के भी कुछ छोटे इलाकों में अचानक बहुत भारी बारिश हो सकती है।
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इस स्थिति में उत्तराखंड के फुटहिल्स और निचली पहाड़ियां सबसे ज्यादा संवेदनशील रहेंगी। लगातार और तेज बारिश के कारण पहाड़ी ढलानों पर भूस्खलन यानी लैंडस्लाइड का खतरा बढ़ सकता है। खासकर उन इलाकों में जोखिम अधिक रहेगा जहां पहले से मिट्टी कमजोर है या भारी बारिश हो चुकी है।
फिलहाल ऐसा कोई संकेत नहीं है कि मानसून ट्रफ जल्द अपनी सामान्य स्थिति में वापस लौटेगी। इसलिए उत्तराखंड में सक्रिय मौसम का दौर अगले सप्ताह तक भी जारी रह सकता है। यानी आने वाले दिनों में बारिश की तीव्रता में कुछ उतार-चढ़ाव जरूर हो सकता है, लेकिन राज्य में मानसून गतिविधि पूरी तरह कमजोर होने की संभावना कम है।
पूर्वानुमान की वैधता
यह पूर्वानुमान 10 से 16 अगस्त 2026 के लिए है। बुधवार को बारिश में अस्थायी कमी आ सकती है, लेकिन इसके बाद सप्ताह के दौरान फिर से गतिविधि बढ़ने की संभावना है। मौसम प्रणालियों की स्थिति के अनुसार अगले सप्ताह तक बारिश के विस्तार और तीव्रता में बदलाव संभव है।
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