मानसून की विदाई अंतिम चरण में, अगले सप्ताह के मध्य तक पूरे भारत से वापसी संभव
मुख्य मौसम बिंदु
- पश्चिमी राजस्थान से मानसून की वापसी की सामान्य तारीख 17 सितंबर और पूरे देश से वापसी की 15 अक्टूबर है।
- 2019 में मानसून की वापसी शुरू होने के कुछ ही दिनों में पूरी हो गई थी, जबकि 2020–2022 में यह अक्टूबर के अंत तक जारी रही।
- उत्तर, पश्चिम और मध्य भारत के अधिकांश हिस्सों से मानसून विदा हो चुका है।
- 13 अक्टूबर तक दक्षिणी, मध्य और पूर्वी भारत के अधिकांश हिस्सों से मानसून की वापसी हो सकती है।
- पूर्वानुमान की वैधता: यह आकलन 16 अक्टूबर 2026 तक मान्य है। वास्तविक समय मौसम परिस्थितियों के अनुसार बदल सकता है।
दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी की प्रक्रिया हमेशा एक जैसी नहीं रहती। आमतौर पर मानसून की वापसी शुरू होने से लेकर पूरी तरह खत्म होने तक चार से छह सप्ताह का समय लगता है। हालांकि, कई बार इसकी रफ्तार अचानक धीमी पड़ जाती है, तो कभी यह तेजी से आगे बढ़ता है। कुछ वर्षों में मानसून की वापसी सामान्य समय-सारणी के अनुसार भी पूरी हो जाती है। राजस्थान के पश्चिमी हिस्सों से मानसून की वापसी शुरू होने की सामान्य तारीख 17 सितंबर है, जबकि पूरे देश से इसकी वापसी की सामान्य तारीख 15 अक्टूबर मानी जाती है। मानसून की वापसी तब पूरी मानी जाती है, जब इसकी वापसी रेखा प्रायद्वीपीय भारत में लगभग 15° उत्तरी अक्षांश तक पहुंच जाती है और देश के बाकी हिस्सों से भी मानसून विदा हो जाता है। इसके पीछे एक अहम वजह यह है कि 15° उत्तरी अक्षांश के दक्षिण में स्थित प्रायद्वीपीय भारत के सबसे दक्षिणी हिस्सों में बारिश उत्तर-पूर्वी मानसून की आधिकारिक शुरुआत से पहले भी शुरू हो सकती है। इस साल भी दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में ऐसी ही स्थिति देखने को मिल रही है। इसलिए दक्षिण भारत में बारिश जारी रहने का मतलब यह नहीं है कि दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी पूरी नहीं हुई है।
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2019 में छह दिन में पूरी हुई वापसी, 2020–2022 में अक्टूबर के अंत तक खिंचा दौर
आमतौर पर दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी शुरू होने के बाद इसे पूरा होने में लगभग 30 दिन लगते हैं। लेकिन मौसम के रिकॉर्ड बताते हैं कि कई बार यह सामान्य समय-सीमा से काफी अलग रहा है। साल 2019 में मानसून की वापसी 9 अक्टूबर को शुरू हुई थी, जो सामान्य तारीख से 39 दिन की देरी थी। इसके बावजूद मानसून तेजी से पीछे हटा और 16 अक्टूबर तक इसकी वापसी पूरी हो गई। यानी वापसी शुरू होने के बाद महज छह से सात दिनों के भीतर यह प्रक्रिया पूरी हो गई। दूसरी ओर, साल 2020 से 2022 के बीच ला नीना की परिस्थितियों वाले वर्षों में मानसून की वापसी अक्टूबर के आखिरी दिनों तक खिंच गई थी। ये उदाहरण बताते हैं कि मानसून की वापसी के लिए तय सामान्य तारीखें केवल औसत समय-सीमा हैं, इनका हर साल बिल्कुल उसी तरह पालन होना जरूरी नहीं है। मौसम प्रणालियों और बारिश की गतिविधियों में बदलाव के कारण वापसी की गति और अवधि अलग-अलग हो सकती है।
13 अक्टूबर तक अधिकांश भारत से मानसून की विदाई, इसके बाद पूरी वापसी के आसार
साल 2026 में दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी 19 सितंबर को शुरू हुई थी। अब तक देश के उत्तरी, पश्चिमी और मध्य हिस्सों से मानसून विदा हो चुका है। फिलहाल इसकी वापसी रेखा सुपौल, रांची, सुंदरगढ़, बरगढ़, बीजापुर, हैदराबाद, बेलगावी और पणजी से होकर गुजर रही है। पश्चिमी हिस्से में मानसून की वापसी लगभग पूरी हो चुकी है, लेकिन पूर्वी भारत के बिहार, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और पूर्वोत्तर भारत के कुछ हिस्सों में बारिश जारी है। अगले तीन दिनों के दौरान मानसून की आगे की वापसी के लिए परिस्थितियां अनुकूल हो रही हैं। अनुमान है कि 13 अक्टूबर तक दक्षिणी प्रायद्वीपीय भारत, मध्य भारत और पूर्वी राज्यों के अधिकांश हिस्सों से मानसून विदा हो जाएगा। इसी दौरान पूर्वोत्तर भारत के भी बड़े हिस्से से इसकी वापसी हो सकती है, हालांकि मिजोरम और त्रिपुरा के कुछ हिस्से बाकी रह सकते हैं। इसके बाद अगले 48 घंटों के भीतर पूरे देश से दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी पूरी होने की संभावना है। इस बार दक्षिण-पश्चिम मानसून की पूरी वापसी और उत्तर-पूर्वी मानसून की शुरुआत लगभग एक साथ हो सकती है या दोनों घटनाओं के बीच अधिकतम 48 घंटे का अंतर रह सकता है।
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