Monsoon 2026 July Update: जुलाई में 95% बारिश के बावजूद राजस्थान-गुजरात में सूखे के संकेत, जानें खेती पर क्या पड़ेगा असर

By: Mohini Sharma | Edited By: Mohini Sharma
Jun 3, 2026, 5:15 PM
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जुलाई मानसून बारिश पूर्वानुमान

मुख्य मौसम बिंदु

  • जुलाई में कुल बारिश लगभग 95% रहने का अनुमान
  • पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में बेहतर बारिश के संकेत
  • पश्चिम और मध्य भारत में कम बारिश की संभावना
  • खरीफ फसलों पर असमान बारिश का असर पड़ सकता है

भारत में मानसून 2026 की शुरुआत जून में अच्छी रहने की उम्मीद है, लेकिन जुलाई महीने में इसकी रफ्तार थोड़ी धीमी पड़ सकती है। स्काईमेट के पूर्वानुमान और उपलब्ध वर्षा मानचित्रों के अनुसार जुलाई में देशभर में कुल बारिश 95% (LPA) रहने का अनुमान है। जुलाई के लिए Long Period Average (LPA) 280.5 मिमी है, यानी इस बार वर्षा सामान्य से लगभग 5% कम रह सकती है। हालांकि यह कमी बहुत बड़ी नहीं है, लेकिन बारिश का वितरण असमान रहने की संभावना है, जिससे कई क्षेत्रों में इसका प्रभाव अधिक महसूस किया जा सकता है।

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जुलाई में मानसून का बदलता मिजाज

जुलाई को आमतौर पर मानसून का सबसे सक्रिय महीना माना जाता है, लेकिन इस बार बारिश का पैटर्न थोड़ा अलग रह सकता है। अनुमान के अनुसार जुलाई में 40% संभावना सामान्य बारिश, 40% संभावना सामान्य से कम बारिश और 20% संभावना सामान्य से अधिक बारिश की है। यह दर्शाता है कि मानसून पूरे महीने एक समान सक्रिय नहीं रहेगा। कई क्षेत्रों में कुछ दिनों तक अच्छी बारिश देखने को मिल सकती है, लेकिन इसके बाद लंबे ब्रेक भी आ सकते हैं। ऐसे में बारिश की कुल मात्रा भले ही सामान्य के करीब रहे, लेकिन उसका वितरण खेती और जल संसाधनों के लिए चुनौती पैदा कर सकता है।

पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में मिलेगी राहत

जुलाई के दौरान पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत के कई हिस्सों में मानसून बेहतर प्रदर्शन कर सकता है। बिहार, पश्चिम बंगाल, असम, मेघालय और आसपास के राज्यों में सामान्य या सामान्य से अधिक बारिश होने की संभावना है। इन क्षेत्रों में पर्याप्त वर्षा से खेतों में नमी बनी रहेगी और खरीफ फसलों को अच्छा समर्थन मिलेगा। दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों, विशेषकर केरल, तटीय कर्नाटक और तेलंगाना में भी सामान्य वर्षा के संकेत हैं। इन क्षेत्रों में मानसून की गतिविधियां मजबूत रह सकती हैं।

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राजस्थान, गुजरात और उत्तर-पश्चिम भारत में बढ़ेगी चिंता

जुलाई में सबसे अधिक चिंता उत्तर-पश्चिम और पश्चिम भारत को लेकर है। वर्षा संकेतों के अनुसार राजस्थान और गुजरात में मानसून कमजोर रह सकता है। पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में भी सामान्य से कम बारिश दर्ज की जा सकती है। इसके अलावा मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के कुछ क्षेत्रों में भी बारिश की कमी देखने को मिल सकती है। अगर जुलाई के दौरान बारिश के लंबे ब्रेक बने रहते हैं, तो इन क्षेत्रों में मिट्टी की नमी तेजी से कम हो सकती है और फसलों पर दबाव बढ़ सकता है।

क्या बन सकते हैं सूखे जैसे हालात?

हालांकि जुलाई में पूरे देश में सूखे की स्थिति बनने की संभावना नहीं है, लेकिन राजस्थान, गुजरात, हरियाणा और पंजाब के कुछ हिस्सों में स्थानीय स्तर पर सूखे जैसे हालात बनने का खतरा बढ़ सकता है। अगर जुलाई के दूसरे हिस्से में भी बारिश सामान्य से कम रहती है, तो इन क्षेत्रों में जल संकट और कृषि संबंधी चुनौतियां बढ़ सकती हैं।

खरीफ फसलों पर क्या पड़ेगा असर?

जुलाई खरीफ फसलों की बढ़वार के लिए बेहद महत्वपूर्ण महीना होता है। इस दौरान पर्याप्त बारिश फसलों की जड़ों को मजबूत बनाती है और उत्पादन की नींव तैयार करती है। पूर्वी भारत में अच्छी बारिश से धान (Rice) की फसल को फायदा मिलने की संभावना है। वहीं मध्य भारत में बारिश की कमी होने पर सोयाबीन की फसल प्रभावित हो सकती है। गुजरात और महाराष्ट्र में कपास (Cotton) की खेती पर भी असर पड़ सकता है। जिन क्षेत्रों में वर्षा कम होगी, वहां मक्का, अरहर और अन्य दलहनी फसलों की वृद्धि भी प्रभावित हो सकती है।

किसानों के लिए क्या हैं संकेत?

जिन क्षेत्रों में सामान्य या अच्छी बारिश की संभावना है, वहां किसान बुवाई और फसल प्रबंधन का काम समय पर पूरा कर सकते हैं। वहीं कम बारिश वाले इलाकों में किसानों को सिंचाई की वैकल्पिक व्यवस्था, जल संरक्षण और फसल प्रबंधन पर विशेष ध्यान देना होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार किसानों को मौसम की स्थिति पर लगातार नजर रखनी चाहिए, क्योंकि जुलाई में बारिश का वितरण असमान रह सकता है।

अल-नीनो का बढ़ता प्रभाव

जुलाई के दौरान अल-नीनो (El Niño) का प्रभाव धीरे-धीरे बढ़ने लगेगा। यही वजह है कि मानसून की सक्रियता में कमी और बारिश के बीच लंबे अंतराल देखने को मिल सकते हैं। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि इसका असर अगस्त और सितंबर में और अधिक स्पष्ट हो सकता है। कुल मिलाकर जुलाई 2026 में मानसून सामान्य से थोड़ा कमजोर रहने का अनुमान है। पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में अच्छी बारिश राहत दे सकती है, जबकि राजस्थान, गुजरात और उत्तर-पश्चिम भारत के कुछ हिस्सों में कम बारिश चिंता का कारण बन सकती है। खरीफ फसलों और जल संसाधनों के लिए यह महीना बेहद अहम रहेगा। जुलाई में मानसून का असमान प्रदर्शन ही तय करेगा कि खरीफ सीजन किसानों के लिए राहत लेकर आएगा या नई चुनौतियां खड़ी करेगा।

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Mohini Sharma
Content Writer
Mohini Sharma is a Content Writer at Skymet Weather Services with nearly five years of experience in journalism. At Skymet, she brings clarity and creativity to weather communication, crafting engaging news stories and updates that simplify complex weather patterns and forecasts. With her precise and relatable writing style, she helps audiences stay informed and connected to the ever-changing world of weather.
FAQ

जुलाई में मानसून सामान्य से थोड़ा कमजोर और असमान रहने की संभावना है।

जुलाई 2026 में पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में सामान्य या उससे अधिक बारिश हो सकती है।

जुलाई में राजस्थान, गुजरात और उत्तर-पश्चिम भारत के कुछ हिस्सों में कम बारिश के कारण सूखे जैसे हालात बन सकते हैं।

डिस्क्लेमर: यह जानकारी स्काइमेट की पूर्वानुमान टीम द्वारा किए गए मौसम और जलवायु विश्लेषण पर आधारित है। हम वैज्ञानिक रूप से सही जानकारी देने का प्रयास करते हैं, लेकिन बदलती वायुमंडलीय स्थितियों के कारण मौसम में बदलाव संभव है। यह केवल सूचना के लिए है, इसे पूरी तरह निश्चित भविष्यवाणी न मानें।

Skymet भारत की सबसे बेहतर और सटीक निजी मौसम पूर्वानुमान और जलवायु इंटेलिजेंस कंपनी है, जो देशभर में विश्वसनीय मौसम डेटा, मानसून अपडेट और कृषि जोखिम प्रबंधन समाधान प्रदान करती है