भारतीय समुद्रों में तूफानी मौसम की शुरुआत, फिर भी चक्रवात बनने की संभावना नहीं, जानें क्यो?

By: AVM GP Sharma | Edited By: Mohini Sharma
Oct 9, 2026, 2:00 PM
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मौसम अपडेट

मुख्य मौसम बिंदु

  • भारत के समुद्री क्षेत्रों में चक्रवात के प्रमुख मौसम मार्च–मई और अक्टूबर–दिसंबर हैं।
  • बहुत मजबूत अल नीनो से बंगाल की खाड़ी में चक्रवाती गतिविधियां बढ़ने की संभावना।
  • 2021 से 2025 के दौरान हर साल अक्टूबर में बंगाल की खाड़ी में चक्रवाती तूफान बना।
  • अक्टूबर 2026 में अब तक भारतीय समुद्रों में कोई स्पष्ट तूफानी सिस्टम सक्रिय नहीं है।
  • पूर्वानुमान की वैधता: यह आकलन 9 अक्टूबर 2026 की उपलब्ध मौसम जानकारी पर आधारित है। अगले लगभग दो सप्ताह के दौरान किसी स्पष्ट चक्रवाती सिस्टम के संकेत नहीं हैं, नई मौसम प्रणालियां बनने पर स्थिति बदल सकती है।

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भारत के आसपास स्थित बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में चक्रवाती तूफान आने के दो प्रमुख मौसम होते हैं। पहला प्री-मानसून सीजन मार्च से मई तक रहता है, जबकि दूसरा पोस्ट-मानसून सीजन अक्टूबर से दिसंबर तक सक्रिय रहता है। हालांकि, चक्रवात बनने के लिए इन महीनों की कोई सख्त सीमा नहीं है। अनुकूल मौसमी परिस्थितियां बनने पर बंगाल की खाड़ी या अरब सागर में साल के किसी भी समय चक्रवात विकसित हो सकता है। साल 2026 का प्री-मानसून सीजन दोनों समुद्रों के लिए तूफान-मुक्त रहा, यानी इस दौरान किसी भी समुद्र में चक्रवाती तूफान नहीं बना। आंकड़ों के लिहाज से भारतीय समुद्री क्षेत्र में प्री-मानसून की तुलना में पोस्ट-मानसून सीजन चक्रवाती गतिविधियों के लिए अधिक सक्रिय रहता है। इसलिए अक्टूबर से दिसंबर के बीच तूफान बनने की संभावना आमतौर पर अधिक रहती है।

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बेहद शक्तिशाली अल नीनो का चक्रवाती गतिविधियों पर असर

इस साल भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में बेहद शक्तिशाली अल नीनो की स्थिति बनी हुई है। अल नीनो और भारतीय समुद्रों में बनने वाले चक्रवाती तूफानों के बीच कुछ संबंध देखा जाता है। अल नीनो के दौरान समुद्र और वायुमंडल की परिस्थितियों में ऐसे बदलाव हो सकते हैं, जो बादलों के विकास, हवाओं के घूमने और बड़े क्षेत्र में वायुदाब के वितरण को प्रभावित करते हैं। ये सभी कारक चक्रवाती गतिविधियों के अनुकूल परिस्थितियां बना सकते हैं। आमतौर पर अल नीनो के वर्षों में बंगाल की खाड़ी में उष्णकटिबंधीय चक्रवात बनने की गतिविधियां अधिक देखी जाती हैं और शक्तिशाली सिस्टम बनने की संभावना भी बढ़ सकती है। इसके उलट, अरब सागर में चक्रवातों की संख्या कम रह सकती है। अरब सागर में बनने वाले तूफानों का रुख कई बार भारतीय तट से दूर समुद्र की ओर हो जाता है, जबकि बंगाल की खाड़ी में बनने वाले चक्रवात भारत के पूर्वी तट, बांग्लादेश और म्यांमार की ओर बढ़ सकते हैं। हालांकि, अल नीनो अकेले किसी चक्रवात के बनने, उसकी ताकत या उसके रास्ते को तय नहीं करता।

अक्टूबर के दौरान बंगाल की खाड़ी में हर साल बना चक्रवात

पिछले पांच वर्षों के आंकड़े बताते हैं कि अक्टूबर के दौरान बंगाल की खाड़ी में हर साल चक्रवाती तूफान बना है। साल 2025 में चक्रवात मोंथा ने आंध्र प्रदेश के तट पर दस्तक दी थी। 2024 में चक्रवात दाना ओडिशा के धामरा बंदरगाह के पास पहुंचा था। साल 2023 में चक्रवात हामून बांग्लादेश के तट को पार कर गया था, जबकि 2022 में चक्रवात सितरंग ने बांग्लादेश के पाटुआखाली क्षेत्र को प्रभावित किया था। इससे पहले 2021 में चक्रवात गुलाब बंगाल की खाड़ी से आगे बढ़कर अरब सागर पहुंचा था, जहां इसने चक्रवात शाहीन का रूप ले लिया था। इसी अवधि में अरब सागर में तुलनात्मक रूप से कम चक्रवाती तूफान बने। साल 2025 में चक्रवात शक्ति का रुख गुजरात की ओर था। 2023 में चक्रवात तेज भारतीय तट से दूर चला गया था, जबकि 2021 में चक्रवात शाहीन ने ओमान और यमन के तटीय क्षेत्रों को प्रभावित किया था। ये उदाहरण बताते हैं कि दोनों समुद्रों में अक्टूबर के दौरान चक्रवाती गतिविधियां हो सकती हैं, लेकिन हर तूफान का रास्ता और प्रभाव अलग होता है।

अक्टूबर में अब तक शांत हैं भारतीय समुद्र, पहला तूफान नवंबर तक टलने की संभावना

अक्टूबर 2026 में अब तक बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में चक्रवात बनने की गतिविधियां शांत रही हैं। आमतौर पर भारतीय समुद्रों में चक्रवाती गतिविधियां उत्तर-पूर्वी मानसून की शुरुआत के आसपास या उसके बाद बढ़ने लगती हैं। उत्तर-पूर्वी मानसून के आगमन की सामान्य तारीख लगभग 20 अक्टूबर मानी जाती है, जिसमें पांच दिन पहले या बाद का अंतर संभव है। यानी इसकी शुरुआत सामान्य परिस्थितियों में 15 से 25 अक्टूबर के बीच हो सकती है। हालांकि, यह कोई निश्चित समयसीमा नहीं है और कुछ वर्षों में उत्तर-पूर्वी मानसून की शुरुआत नवंबर तक भी टल चुकी है। इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून की पूरी तरह वापसी 15 अक्टूबर तक होने की संभावना है। इसके बाद उत्तर-पूर्वी मानसून के आगमन का रास्ता साफ हो सकता है। इसके बावजूद अगले लगभग दो सप्ताह के दौरान भारतीय समुद्रों में चक्रवात बनाने के अनुकूल किसी स्पष्ट मौसम प्रणाली के संकेत नहीं हैं। ऐसे में पोस्ट-मानसून सीजन 2026 का पहला चक्रवाती तूफान अक्टूबर के आखिरी दिनों तक टल सकता है। यह भी संभव है कि पहले तूफान के लिए नवंबर 2026 तक इंतजार करना पड़े। हालांकि, मौसम प्रणालियों में बदलाव होने पर स्थिति बदल सकती है।

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AVM GP Sharma
President of Meteorology & Climate Change
AVM Sharma, President of Meteorology & Climate Change at Skymet Weather Services, is a retired Indian Air Force officer who previously led the Meteorological Branch at Air Headquarters in New Delhi. With over a decade of experience at Skymet, he brings a wealth of knowledge and expertise to the organization.
FAQ

भारत के आसपास बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में चक्रवात के दो प्रमुख मौसम होते हैं। पहला मार्च से मई तक और दूसरा अक्टूबर से दिसंबर तक रहता है। हालांकि, अनुकूल परिस्थितियों में साल के दूसरे समय में भी चक्रवात बन सकता है।

9 अक्टूबर 2026 पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अगले लगभग दो सप्ताह तक किसी स्पष्ट चक्रवाती सिस्टम के संकेत नहीं हैं। पहला तूफान अक्टूबर के अंत तक टल सकता है या नवंबर में बन सकता है।

अल नीनो वायुमंडलीय संवहन, हवाओं के घूमने और वायुदाब के वितरण को प्रभावित कर सकता है। इसके दौरान बंगाल की खाड़ी में चक्रवाती गतिविधियां अधिक और अरब सागर में कम हो सकती हैं। हालांकि, हर साल इसका प्रभाव एक जैसा नहीं होता।

डिस्क्लेमर: डिस्कलेमर- यह विश्लेषण स्काइमेट के मौसम संबंधी आंकड़ों, आंतरिक पूर्वानुमान मॉडल, मौसम केंद्रों से प्राप्त जानकारी, जलवायु संबंधी डेटा और स्काइमेट की मौसम विशेषज्ञ टीम के आकलन पर आधारित है। सटीक जानकारी देने का पूरा प्रयास किया गया है, लेकिन मौसम लगातार बदलने वाली प्राकृतिक प्रक्रिया है, इसलिए परिस्थितियां समय के साथ बदल सकती हैं। यह जानकारी केवल सामान्य सूचना के उद्देश्य से दी गई है और इसे अंतिम या पूरी तरह निश्चित मौसम पूर्वानुमान नहीं माना जाना चाहिए।

Skymet भारत की सबसे बेहतर और सटीक निजी मौसम पूर्वानुमान और जलवायु इंटेलिजेंस कंपनी है, जो देशभर में विश्वसनीय मौसम डेटा, मानसून अपडेट और कृषि जोखिम प्रबंधन समाधान प्रदान करती है