[Hindi] मॉनसून की मदद से 8% पर जा सकती है भारत की जीडीपी : क्रिसिल

July 28, 2016 2:10 PM|

Paddy crop in India Civilsdaily 600वैश्विक संस्था क्रिसिल ने कहा है कि भारत में वर्ष 2016 के बेहतर मॉनसून के चलते चालू वित्त वर्ष में देश की विकास दर 8 फीसद को भी पार कर सकती है। संस्था का कहना है कि लगभग सभी भागों में हो रही अपेक्षित वर्षा से भारत के कृषि क्षेत्र को बढ़ावा मिलेगा जिससे देश के सकल घरेलू उत्पाद यानि जीडीपी में यह बढ़ोत्तरी हो सकती है। अनेक क्षेत्रों और विषयों का विश्लेषण करने वाली तथा दुनिया भर के देशों और संगठनों को मानक जारी करने वाली संस्था क्रिसिल ने हाल ही में अपनी रिपोर्ट में इस बाबत विस्तार से बताया है।

संस्था की रिपोर्ट आशाजनक है जिसमें कहा गया है कि मॉनसून का प्रदर्शन बेहतर हो रहा है जिससे इस वर्ष कृषि की विकास दर्ज उछल कर 6 प्रतिशत तक पहुँच सकती है जो जीडीपी को 8 फीसदी के स्तर तक ले जाने का इंजन होगी। हाल में जारी की गई रिपोर्ट में कल्पना की गई है कि इस वर्ष की मॉनसूनी बारिश का वितरण समय पर और सभी जगह उचित मात्रा में होगा जिससे कृषि को व्यापक रूप में लाभ होगा, परिणामस्वरूप जीडीपी विकास दर 7.9 फीसदी तक पहुँच सकती है।

जून में मॉनसून का प्रदर्शन अपेक्षाकृत सुस्त था लेकिन जुलाई में बेहतर मॉनसूनी बारिश के चलते भारत में सामान्य के आसपास वर्षा दर्ज की जा चुकी है। 25 जुलाई तक के बारिश के आंकड़ों के अनुसार देश में सामान्य से महज़ 1 फीसदी कम वर्षा हुई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अच्छी वर्षा के चलते ना केवल खेतों में खड़ी फसल को लाभ पहुंचा है बल्कि कुछ समय पूर्व तक पूरी तरह से सूख चुके जलाशयों में व्यापक मात्रा में पानी इकठ्ठा होने से किसानों का आत्मविश्वास भी बढ़ा है।

रिपोर्ट के अनुसार 8 राज्यों के 89 ज़िले ऐसे हैं जहां सामान्य से अधिक बारिश हुई है जिससे खरीफ फसलों की बुआई में तेज़ी आई है और उम्मीद है कि इससे उत्पादन बढ़ेगा। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि मॉनसून के दूसरे पक्ष में भी होने वाली बारिश कृषि के लिहाज़ से बेहद अहम होगी। इससे पहले जून के मध्य तक दक्षिणी राज्यों को छोड़कर देश के अधिकांश हिस्सों में बारिश पिछड़ रही थी। इस समय के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत को छोड़कर देश के बाकी सभी भागों में सामान्य या सामान्य से अधिक वर्षा दर्ज की गई है। पूर्वी और पूर्वोत्तर राज्यों का देश के कुल खाद्यान्न उत्पादन में मात्र 16 प्रतिशत का ही योगदान है।

महाराष्ट्र,राजस्थान,मध्य प्रदेशऔरछत्तीसगढ़के अधिकतर इलाकों में सिंचाई की सुविधा का बेहद अभाव है और अच्छी बात यह है कि इन राज्यों में सामान्य से अधिक वर्षा दर्ज की गई है। दूसरी ओर कम वर्षा वाले राज्यों का ज़िक्र करें तोगुजरातमें सामान्य से 48.3 प्रतिशत कम,हिमाचल प्रदेशमें सामान्य से 27.9 प्रतिशत कम,असममें सामान्य से 25 प्रतिशत कम औरकेरलमें सामान्य से 20 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि अच्छे मॉनसून से कृषि क्षेत्र का प्रदर्शन इस वर्ष बेहतर रहेगा और यह भारत की अर्थव्यवस्था को दो अर्थों में लाभ पहुंचाएगी; पहला इससे कीमतें नियंत्रण में रहेंगी और दूसरा किसानों की आमदनी बढ़ेगी। किसानों की आय बढ़ने से वह कृषि कार्यों से जुड़े उपकरण पर पैसे खर्च करने की स्थिति में आ जाता है जिससे मांग में आई सुस्ती में सुधार देखने को मिल सकता है। खरीफ फसल की उत्पादकता वनस्पति तेलों, चीनी, वस्त्र, खाद्य उत्पाद और पैकिंग जैसे क्षेत्रों पर असर डालती है।

 

Image credit: Civilsdaily.com

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