पर्वतीय इलाकों में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ, अगले वीकेंड भारी बर्फबारी के आसार
मुख्य मौसम बिंदु
- उत्तरी पहाड़ों में दिसंबर–जनवरी में 95–100% तक बर्फबारी की कमी
- 22 जनवरी से मौसम गतिविधियों में तेज़ी
- 24–26 जनवरी के बीच भारी और व्यापक बर्फबारी
- पर्यटन, सड़क और हवाई यातायात पर असर संभव
इस शीत ऋतु में उत्तरी पर्वतीय राज्यों में अब तक बारिश और बर्फबारी की भारी कमी बनी हुई है। दिसंबर महीना लगभग पूरी तरह सूखा रहा और पहाड़ी राज्यों में मौसमी कमी 90 प्रतिशत से अधिक दर्ज की गई। हालात जनवरी 2026 के पहले दो हफ्तों में भी नहीं सुधरे और बर्फबारी की कमी 95 से 100 प्रतिशत के बीच पहुंच गई है। हालांकि, अब मौसम में बदलाव के संकेत मिल रहे हैं और अगले सप्ताह से एक सप्ताह तक सक्रिय मौसम गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं। अनुमान है कि वीकेंड के आसपास भारी बर्फबारी हो सकती है, जिससे लंबे समय से चले आ रहे सूखे का असर कुछ हद तक कम होगा।
पश्चिमी विक्षोभ की एंट्री, ऊंचे इलाकों से शुरू होगी बर्फबारी
एक पश्चिमी विक्षोभ पहले ही ऊंचे पर्वतीय इलाकों को प्रभावित करने के लिए आगे बढ़ चुका है। करीब 12,000 फीट से अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में जल्द ही बारिश और बर्फबारी की शुरुआत होने की संभावना है। साथ ही, निचले पर्वतीय क्षेत्रों, कश्मीर घाटी और तराई इलाकों तक बादल फैल चुके हैं। बहुत जल्द राजस्थान के मध्य भागों के ऊपर एक प्रेरित चक्रवाती परिसंचरण बनने की संभावना है। पश्चिमी विक्षोभ और इस चक्रवाती सिस्टम का दोहरा असर मौसम गतिविधियों की तीव्रता और विस्तार को और बढ़ा देगा।
22 जनवरी से मैदानी और पर्वतीय इलाकों में एक साथ असर
22 जनवरी से उत्तर भारत के पर्वतीय और मैदानी इलाकों में बारिश और बर्फबारी का असर देखने को मिलेगा। मौसम गतिविधियों की तीव्रता और क्षेत्रफल धीरे-धीरे बढ़ते जाएंगे और यह दौर गणतंत्र दिवस 2026 के आसपास चरम पर पहुंच सकता है। मौसम गतिविधियाँ 22 जनवरी 2026 से जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में शुरू होंगी और अगले 4–5 दिनों में लगातार फैलती रहेंगी। 24 से 26 जनवरी 2026 के बीच उत्तर भारत के सभी पर्वतीय राज्य एक साथ कठोर मौसम की चपेट में आ सकते हैं।
पर्यटन और यातायात पर गहरा असर, महीने के अंत में ही राहत
आने वाला मौसम दौर भारी और चुनौतीपूर्ण रहने की आशंका है। दुर्गम पर्वतीय इलाकों में परिवहन से जुड़ी सामान्य परेशानियां और बढ़ेंगी, जिससे जनजीवन प्रभावित हो सकता है। श्रीनगर, पहलगाम, गुलमर्ग, मनाली, डलहौजी, शिमला और मुक्तेश्वर जैसे प्रमुख पर्यटन स्थल एक साथ प्रभावित होंगे। राष्ट्रीय राजमार्ग और मुख्य सड़कें बाधित या बंद होने के जोखिम में रहेंगी। वहीं, हवाई यातायात भी अस्त-व्यस्त हो सकता है और उड़ानों के समय-सारणी पर असर पड़ेगा। महीने के अंतिम दिनों में ही मौसम साफ होने की उम्मीद है। इस पूरे घटनाक्रम के करीब आने पर पूर्वानुमान की फिर से समीक्षा की जाएगी।







