देशभर में बढ़ेगा मानसून का असर, बंगाल की खाड़ी से नया लो प्रेशर, सितंबर की शुरुआत में भारी बारिश के आसार

By: skymet team | Edited By: skymet team
Aug 29, 2025, 7:30 PM
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बंगाल की खाड़ी में लो प्रेशर एरिया, सांकेतिक फोटो

पुराने लो-प्रेशर क्षेत्र का अवशेष अब मध्य प्रदेश के मध्य भाग पर चक्रवाती परिसंचरण के रूप में सक्रिय है। यह सिस्टम अगले 3–4 दिनों तक इसी इलाके में घूमता रहेगा। इस बीच बंगाल की खाड़ी के उत्तर-पूर्वी हिस्से में एक और नया लो-प्रेशर क्षेत्र बनने जा रहा है। इन दोनों सिस्टम की वजह से पूर्व, मध्य और पश्चिम भारत में मानसूनी बारिश का सिलसिला जारी रहेगा। सितंबर महीने की शुरुआत ही बारिश के साथ होगी और पहले हफ़्ते में देश के बड़े हिस्से में मानसून की तेजी बनी रहेगी।

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दक्षिण चीन सागर से उठ रहा नया सिस्टम

नया लो-प्रेशर क्षेत्र अपनी जड़ें दक्षिण चीन सागर से लेगा। इस समय वहाँ ट्रॉपिकल डिप्रेशन (TD 20) चिन्हित है, जो चीन के हैनान प्रांत के दक्षिण में स्थित है। यह सिस्टम आज रात उत्तर वियतनाम तट को पार करेगा और फिर लाओस, उत्तर थाईलैंड और म्यांमार के भीतरी हिस्सों से गुज़रेगा। इसके अवशेष 1 सितंबर को बंगाल की खाड़ी में प्रवेश करेंगे और 12–24 घंटों में संगठित होकर लो-प्रेशर क्षेत्र का रूप ले लेंगे। 2–3 सितंबर तक यह और मजबूत होकर ‘वेल मार्क्ड लो-प्रेशर’ बनने की संभावना है।

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ओडिशा तट पर दस्तक देगा नया सिस्टम

यह नया लो-प्रेशर सिस्टम 4 सितंबर को ओडिशा तट से टकराने की संभावना है। इसी समय एक ओर पुराना सिस्टम गुजरात के पास सक्रिय रहेगा और दूसरी ओर नया सिस्टम ओडिशा–पश्चिम बंगाल पर। ये दोनों सिस्टम मानसून ट्रफ से जुड़े रहेंगे, जिससे पूरे ट्रफ लाइन पर एक सक्रिय शियर ज़ोन बनेगा और बारिश की गतिविधियाँ और तेज़ हो जाएँगी।

पहले हफ्ते में व्यापक बारिश

सितंबर के पहले सप्ताह में देश के बड़े हिस्सों में सक्रिय से प्रचंड मानसून की स्थिति रहेगी। इन सिस्टम्स के असर से पश्चिम बंगाल, ओडिशा, झारखंड, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, मध्य महाराष्ट्र और कोकण-गोवा (मुंबई सहित) में भारी वर्षा के आसार हैं। इससे पूरे सप्ताह तक मानसून का जोरदार असर बना रहेगा।

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डिस्क्लेमर: यह जानकारी स्काइमेट की पूर्वानुमान टीम द्वारा किए गए मौसम और जलवायु विश्लेषण पर आधारित है। हम वैज्ञानिक रूप से सही जानकारी देने का प्रयास करते हैं, लेकिन बदलती वायुमंडलीय स्थितियों के कारण मौसम में बदलाव संभव है। यह केवल सूचना के लिए है, इसे पूरी तरह निश्चित भविष्यवाणी न मानें।

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