लंबे सूखे के बाद राजस्थान में मानसून की जोरदार वापसी, भारी बारिश से बाढ़ का खतरा, कई जिलों में खतरा
राजस्थान लंबे समय से सूखे जैसे हालात झेल रहा था। लेकिन अब मानसून की बरसात से राहत मिली है। पिछले 48 घंटों में कई जिलों में भारी से अति भारी बारिश दर्ज की गई है। इसके चलते कई जगहों पर स्थानीय बाढ़, फसलों को नुकसान और मौसमी वर्षा के आंकड़ों में बड़ी बढ़ोतरी देखने को मिली है।
शुरुआती दौर में बेहतर रहा था मानसून
2025 का दक्षिण-पश्चिम मानसून राजस्थान में मजबूत शुरुआत के साथ आया था। जून और जुलाई के पहले हिस्से में अच्छी बारिश हुई और कई जिलों में सामान्य से अधिक से भी ज्यादा वर्षा दर्ज हुई। जुलाई के मध्य तक ही कई शहरों में लॉन्ग पीरियड एवरेज (LPA) से ज्यादा बारिश हो चुकी थी।
जुलाई के दूसरे हिस्से में बिगड़ा हालात
जुलाई के अखिरी और अगस्त के पहले 20 दिनों में मौसम की तस्वीर बदल गई। बंगाल की खाड़ी से बनने वाले अधिकांश सिस्टम ओडिशा, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, विदर्भ, दक्षिण मध्य प्रदेश, गुजरात और उत्तर महाराष्ट्र की ओर बढ़े। इस दौरान राजस्थान लगभग सूखा ही रहा। लगातार कई हफ्तों तक बारिश न होने से सूखे जैसे हालात बन गए। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 50% से ज्यादा खड़ी फसलें खराब हो गईं और कृषि संकट गहराने लगा।
सक्रिय मौसम प्रणालियों से हुई बारिश की वापसी
हाल ही में हुई बारिश दो सक्रिय मौसमी प्रणालियों से जुड़ी है। जिसमें पहली मौसम प्रणाली में मानसून ट्रफ की धुरी उत्तर की ओर खिसककर गंगानगर और चूरू से गुजर रही है। दूसरी मौसम प्रणाली में उत्तर-पश्चिम मध्य प्रदेश और पश्चिम राजस्थान पर चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ है। इन दोनों प्रणालियों के संयुक्त असर से पूर्वी और दक्षिणी राजस्थान में जोरदार बारिश हुई थी, जो अब मध्य और पश्चिमी जिलों तक फैल रही है।
जिलों में बारिश का हाल
कोटा और जवई बांध में 24 घंटे के भीतर तीन अंकों वाली वर्षा दर्ज की गई। जोधपुर, पाली, फलोदी, बाड़मेर और जयपुर में भी मध्यम से भारी बारिश हुई। कई निचले इलाकों में जलभराव और अचानक आई बाढ़ की स्थिति बनी। नदियों और बांधों का जलस्तर तेज़ी से बढ़ रहा है। आगे के दिनों में अलवर, दौसा, करौली, सवाई माधोपुर, जयपुर, कोटा, बूंदी, बारां, भीलवाड़ा, उदयपुर, चित्तौड़गढ़, राजसमंद, डूंगरपुर, अजमेर और टोंक में व्यापक बारिश की संभावना है। वहीं, जोधपुर, बाड़मेर, बीकानेर, चूरू, गंगानगर, हनुमानगढ़, सीकर और झुंझुनूं में छिटपुट वर्षा हो सकती है। गौरतलब है, जैसलमेर में सामान्य तौर कम बारिश होती है, वहां भी हल्की से मध्यम बौछारें दर्ज की जा सकती हैं।
कब थमेगी बारिश?
28 अगस्त के बाद बारिश की तीव्रता धीरे-धीरे कम हो जाएगी। मौसमी पैटर्न के अनुसार यह राजस्थान के लिए इस सीजन की आखिरी बहुत भारी बारिश हो सकती है। वहीं, दक्षिण-पश्चिम मानसून आमतौर पर 17 सितंबर के आसपास पश्चिमी राजस्थान से विदाई लेना शुरू करता है। इस लिहाज़ से यह मौजूदा बरसात का दौर मानसून की विदाई से पहले की आखिरी बड़ी बारिश मानी जा रही है।
भारी बारिश का कृषि पर असर
इस देर से हुई बारिश ने किसानों को जीवनदायी राहत दी है, क्योंकि मिट्टी में नमी बढ़ रही है, जलाशयों का स्तर ऊपर जा रहा है। इसके साथ ही खेतों में देर से बोई गई फसलों की अंकुरण प्रक्रिया को मदद मिलेगी है।हालांकि लंबे सूखे ने पहले ही बड़ी पैमाने पर फसलों को नुकसान पहुंचाया है, लेकिन मौजूदा बारिश खड़ी फसलों को स्थिर करने, भूजल रिचार्ज करने और रबी सीज़न से पहले खेती-किसानी की उम्मीद जगाने का काम कर रही है। कुल मिलाकर, राजस्थान में मानसून की यह वापसी किसानों के लिए राहत की सांस तो है, लेकिन बाढ़ और फसल क्षति की चुनौती भी लेकर आई है।
यह भी पढ़ें: दिल्ली-एनसीआर में बढ़ेंगी मानसून की गतिविधियाँ, 22 से 26 अगस्त तक झमाझम के आसार, पढ़ें पूरा मौसम अपडेट





