पिछले 10 दिनों में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून में अच्छी प्रगति देखने को मिली है। इसके साथ ही पूर्वी, मध्य और दक्षिण भारत में कुछ स्थानों पर बारिश देखने को मिल रही है। मॉनसून 20 जून से 25 जून के बीच लगातार 6 दिन आगे बढ़ता रहा। इस समय को मॉनसून के संदर्भ में जून का सबसे अच्छा समय माना जा सकता है, जिसका पूर्वानुमान स्काइमेट ने पहले ही जताया था।
उसके पश्चात मॉनसून की प्रगति में फिर से ब्रेक लगी और 3 दिनों तक मॉनसून आगे नहीं बढ़ा। हालांकि 28 जून को मॉनसून में कुछ प्रगति देखने को मिली, खासकर गुजरात, और मध्य प्रदेश में मॉनसून आगे बढ़ा। इस समय मॉनसून की उत्तरी सीमा द्वारका, अहमदाबाद, भोपाल, जबलपुर, पेंड्रा, सुल्तानपुर, लखीमपुर खीरी और मुक्तेश्वर पर है।
आगे बढ़ने की रफ्तार में सुस्ती और कमजोर मॉनसून के कारण देशभर में बारिश में कमी का आंकड़ा 33% पर बना हुआ है। मॉनसून सीज़न के शुरुआती महीने जून में सबसे कम मॉनसून वर्षा पूर्वी व पूर्वोत्तर भारत में हुई। इन भागों में 1 जून से अब तक बारिश में कमी का आंकड़ा सबसे ज्यादा 37% रहा। उत्तर-पश्चिम भारत दूसरे स्थान पर रहा। जहां सामान्य से 32% कम वर्षा दर्ज की गई। मध्य भारत में 31% और दक्षिणी राज्यों में 30% कम वर्षा रिकॉर्ड की गई। नीचे दिए गए चित्र में लाल, पीला और सफेद रंग बारिश में कमी के स्तर को दर्शा रहा है।
Rain
जून में कमजोर मॉनसून के कारण देशभर में मौजूद जलाशयों में पानी का स्तर उनकी क्षमता के मुकाबले काफी नीचे बना हुआ है। देश में लगभग 91 बड़े जलाशय या बांध हैं जिनमें 86 जलाशयों में दीर्घ अवधि औषत क्षमता के मुकाबले 40% से भी कम पानी उपलब्ध है। सबसे अधिक 31 जला से दक्षिण भारत में हैं जिनमें 30 जलाशयों में पानी क्षमता की तुलना में 40% से भी कम है। पश्चिमी और पूर्वी भारत में भी जलाशयों में पानी की स्थिति चिंताजनक स्तर पर है। नीचे दिए गए टेबल में देशभर में जलाशयों में उपलब्ध पानी का स्तर आप देख सकते हैं।
जुलाई में एक पखवाड़े में अच्छी बारिश के संकेत
जून में कम बारिश के बाद अब आने वाले 15 दिनों में अच्छी बारिश के संकेत मिल रहे हैं। अनुमान है कि 30 जून से 15 जुलाई के बीच मॉनसून का प्रदर्शन अपेक्षाकृत अच्छा रहेगा। हालांकि इस अवधि में कुछ समय के लिए मॉनसून सुस्त भी हो सकता है। शुरुआत 30 जून से ओड़ीशा और उत्तरी तटीय आंध्र प्रदेश से होगी। बंगाल की खाड़ी में एक निम्न दबाव का क्षेत्र विकसित हुआ है, यही सिस्टम अगले कुछ दिनों के दौरान मूसलाधार बारिश का कारण बनेगा। सबसे पहले इस सिस्टम का प्रभाव ओड़ीशा पर देखने को मिलेगा उसके बाद उत्तरी तटीय आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तरी तेलंगाना, उत्तरी मध्य महाराष्ट्र, राजस्थान और गुजरात में के भी कुछ भागों में भारी बारिश होगी। इन भागों में 30 जून से 4-5 जुलाई के बीच भारी बारिश के आसार हैं।
मध्य भारत के भागों में अच्छी बारिश की संभावना को देखते हुए किसानों को सुझाव है कि अगर अब तक बुआई नहीं की है तो कर लें। साथ ही भारी बारिश की स्थिति में खेतों से पानी की निकासी का भी उचित प्रबंध करें ताकि फसलों को जलभराव के कारण नुकसान ना हो। किसानों को यह भी सलाह है कि खेतों में घास-फूस को बढ़ने से रोकने के लिए निराई गुड़ाई कर लें। इससे न सिर्फ फसलों का बेहतर विकास होगा बल्कि धान, सोयाबीन और दाल की फसलों में कीट और रोगों पर नजर रखने में भी मदद मिलेगी।
मुंबई में भारी बारिश का पूर्वानुमान
देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में 3 से 5 जुलाई के बीच बाढ़ जैसी स्थिति की आशंका है। अनुमान है कि इस दौरान महानगर और आसपास के इलाकों में 1 दिन में 200 मिलीमीटर या उससे भी अधिक वर्षा रिकॉर्ड की जा सकती है। जिससे सामान्य जनजीवन व्यापकता रूप में प्रभावित होगा। मुंबई में जैसी बारिश जून के आखिर में हुई है, जुलाई की शुरुआत कुछ उसी तर्ज पर होने की संभावना है।
चेन्नई में बढ़ता जल संकट
चेन्नई में लंबे समय से बारिश नहीं हुई है। दक्षिण भारत के सबसे बड़े महानगर चेन्नई में पानी की कमी का संकट बढ़ता जा रहा है, क्योंकि जलाशयों में क्षमता के मुकाबले बहुत कम पानी बचा है। जुलाई के पहले सप्ताह में चेन्नई में शुष्क मौसम ज्यादातर समय रहेगा जिससे स्थितियाँ और विकट हो सकती हैं।
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